यूपी नियामक आयोग ने संविदा कर्मियों की छंटनी पर मांगा जवाब, उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल
विद्युत नियामक आयोग ने यूपी पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन से संविदा कर्मियों की छंटनी और नियमित भर्ती न होने पर तीन ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
नियामक आयोग ने ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन से रिपोर्ट मांगी।
संविदा कर्मियों की छंटनी, नियमित भर्ती का मुद्दा।
उपभोक्ता परिषद ने 'समान काम, समान वेतन' की मांग की।
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। विद्युत नियामक आयोग ने बिजली निगमों में संविदा कर्मियों की छंटनी और नियमित भर्ती न होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक से तीन दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
यह निर्देश अयोध्या में आयोजित सुनवाई के दौरान उठाए गए मुद्दों के बाद दिया गया। सुनवाई में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने आरोप लगाया था कि प्रदेश की बिजली कंपनियों में लंबे समय से नियमित पदों पर भर्ती नहीं की जा रही है और बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पहले बिजली कंपनियों में करीब 85 हजार संविदा कार्मिक कार्यरत थे, जिनमें से 10 हजार से अधिक को हटाया जा चुका है। इन कर्मचारियों को प्रदेश सरकार के संविदा सेवा नियमों से अलग रखा गया है।
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परिषद ने आयोग को बताया कि प्रदेश में करीब 3.72 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के अनुपात में पर्याप्त मानव संसाधन नहीं है। इसके बावजूद बिजली कंपनियों के परिचालन और अनुरक्षण खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। वर्ष 2025-26 में जहां इसके लिए 8990 करोड़ रुपये का प्रविधान है, वहीं 2026-27 में इसे बढ़ाकर 9452 करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया है।
परिषद ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए संविदा कर्मियों के लिए ‘समान काम के लिए समान वेतन’ लागू करने की मांग भी उठाई।
