यूपी के हजारों साल पुराने रॉक आर्ट को मिलेगी नई पहचान, अब चट्टानी भित्तिचित्रों का तैयार होगा डिजिटल रिकॉर्ड
उत्तर प्रदेश सरकार हजारों साल पुराने भित्तिचित्रों (राक आर्ट) को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित करने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत डिजिटल रिकार्ड और मैपिंग कराई जाएगी।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
UP सरकार प्राचीन रॉक आर्ट के संरक्षण की तैयारी में।
डिजिटल रिकार्ड और मैपिंग से होगा मौजूदा स्थिति का आकलन।
चंदौली, सोनभद्र, मिर्जापुर में पहले चरण में होगा काम।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चट्टानों पर उकेरे गए हजारों वर्ष पुराने भित्तिचित्रों (राक आर्ट) को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित करने की तैयारी की जा रही है। प्रदेश सरकार प्राचीन राक आर्ट स्थलों का डिजिटल रिकार्ड और मैपिंग कराने के साथ उनकी मौजूदा स्थिति का आकलन कराएगी।
इसके आधार पर संरक्षण आदि के लिए काम किया जाएगा। पहले चरण में चंदौली, सोनभद्र, मिर्जापुर और आसपास के क्षेत्रों के राक आर्ट स्थलों को शामिल करने का प्रस्ताव है। इसके लिए अपर मुख्य सचिव पर्यटन एवं संस्कृति अमृत अभिजात ने कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं।
2025 में हुआ था समझौता
शुक्रवार को राक आर्ट के डिजिटलीकरण को लेकर राज्य पुरातत्व निदेशालय और नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आइजीएनसीए) के बीच वर्ष 2025 में समझौता हुआ है। अपर मुख्य सचिव ने गुरुवार को इसे लेकर हुई बैठक में कहा कि इन चित्रों में पिछली पीढ़ियों की कहानियां, उनकी कल्पना, मान्यताएं और जीवन शैली दर्ज हैं।
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दोनों संस्थाएं मिलकर दस्तावेजीकरण करेंगी, इसके तहत विशेषज्ञों की फील्ड जांच के आधार पर चट्टानों पर बने चित्रों की स्थिति, उनके संरक्षण की जरूरत और संभावित तकनीकी उपायों का रिकार्ड तैयार किया जाएगा। इस पहल को बाद के दौर की चित्रकला से भी जोड़ा जाएगा। 15वीं से 19वीं शताब्दी के बीच बने ऐतिहासिक भित्तिचित्रों की स्थिति का भी आकलन कर वैज्ञानिक संरक्षण के उपाय किए जाएंगे।
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संरक्षण कार्य से पहले तकनीकी अधिकारियों, कारीगरों और सहायकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि काम के दौरान विरासत को नुकसान न पहुंचे। बैठक में बताया गया कि सर्वेक्षण में आवश्यकता सामने आने पर चुनिंदा स्थलों पर पुरातात्विक अन्वेषण पर भी विचार किया जा सकता है। बैठक में राज्य पुरातत्व निदेशक रेनू द्विवेदी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के आदि दृश्य विभाग की प्रमुख प्रो. रिचा नेगी आदि मौजूद रहे।
