पोर्टल पर डाटा अधूरा: UP के 15.35 लाख किसानों की PM किसान किस्त रुकी, केंद्र के रुख के बाद शासन सख्त
उत्तर प्रदेश में 15.35 लाख से अधिक किसानों की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किस्तें रुकी हुई हैं क्योंकि उनके डेटा में विसंगतियां हैं।

HighLights
यूपी में 15.35 लाख किसानों की पीएम किसान किस्तें रुकीं।
अधूरे डेटा और विसंगतियों के कारण सूची से बाहर होने की आशंका।
सितंबर अंत तक सभी लंबित प्रकरणों के सत्यापन के निर्देश।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश के 15,35,858 लाख किसानों के प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) की पात्रता सूची से बाहर होने की आशंका खड़ी हो गई है। ये सभी किसान भारत सरकार के पोर्टल पर संदिग्ध अथवा अपूर्ण जानकारी वाली श्रेणी में शामिल हैं और इनकी सम्मान निधि की किस्त पर रोक लगी हुई है। केंद्र के निर्देशों के बाद भी अब तक इनका सत्यापन भी पूरा नहीं हुआ है। अब शासन ने सितंबर के अंत तक सभी लंबित प्रकरणों के शत-प्रतिशत सत्यापन के निर्देश दिए हैं।
भारत सरकार ने पंजीकरण के समय भूमि स्वामित्व और अन्य विवरणों में विसंगतियों के कारण बड़ी संख्या में सम्मान निधि योजना के संदिग्ध लाभार्थियों की सूची जारी की थी। इनका सत्यापन कर पोर्टल पर डाटा अपडेट कराने को कहा गया था। ‘अपडेट मिसिंग इंफार्मेशन’ श्रेणी में लंबित इन प्रकरणों में सबसे अधिक 10,19,117 मामले पूर्व भूमि स्वामी की पहचान अधूरी होने से जुड़े हैं।
कितने मामले अटके?
2,74,742 प्रकरणों में विरासत के अलावा किसी अन्य कारण से म्यूटेशन दर्ज है, जबकि 2,41,999 मामलों में पूर्व और वर्तमान, दोनों भूमि स्वामियों का डाटा दर्ज है। सत्यापन के विभिन्न स्तरों पर भी बड़ी संख्या में प्रकरण लंबित हैं। 8,422 लाभार्थी ‘संदिग्ध नाबालिग डाटा’ में हैं। वहीं 64,528 ओपन सोर्स पेंडिंग डाटा में शामिल हैं। वहीं पांच प्रतिशत भौतिक सत्यापन से जुड़े मामले भी अटके हुए हैं।
वर्ष 2022-23 और 2023-24 में चयनित गांवों के पीएम-किसान लाभार्थियों के सत्यापन के लिए तय लक्ष्य के बावजूद 3,70,069 लाभार्थियों का सत्यापन कर एप पर अपलोड किया जाना बाकी है। इसके अतिरिक्त 31,133 प्रकरण एक ही परिवार के सदस्य से संदिग्ध रूप से जुड़े होने के कारण लंबित हैं।
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शासन ने संबंधित अधिकारियों को इन प्रकरणों के निस्तारण के लिए किसानों की सक्रिय भागीदारी और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से अभियान चलाने को कहा है। निर्देश दिए गए हैं कि सितंबर में चल रहे फार्मर रजिस्ट्री अभियान के साथ पीएम-किसान के सत्यापन को जोड़ते हुए माइक्रो प्लान तैयार किया जाए।
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पांच प्रतिशत भौतिक सत्यापन से जुड़े सभी मामलों का सत्यापन 30 सितंबर तक अनिवार्य रूप से पूरा कर एप पर अपलोड कराया जाए। जिला स्तर पर उप कृषि निदेशक और तहसील स्तर पर तहसीलदार लंबित प्रकरणों की साप्ताहिक समीक्षा करेंगे। ब्लाक, तहसील और जिला स्तर पर जिम्मेदारी तय कर प्रतिदिन प्रगति की निगरानी भी की जाएगी।
