यूपी पंचायत चुनाव को लेकर HC के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगा प्रधान संगठन, सरकार भी ले रही कानूनी सलाह
इलाहाबाद हाई कोर्ट के तीन महीने में पंचायत चुनाव कराने के आदेश पर यूपी सरकार जल्दबाजी में निर्णय नहीं ले ...और पढ़ें

पंचायत चुनाव को लेकर हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगा प्रधान संगठन।
HighLights
यूपी सरकार पंचायत चुनाव पर जल्दबाजी में नहीं, ले रही विधिक राय।
प्रधान संगठन हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ SC में अपील करेगा।
ओबीसी आरक्षण के 'ट्रिपल टेस्ट' को अपील का आधार बनाएगा।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव तीन महीने में कराने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर प्रदेश सरकार फिलहाल जल्दबाजी में निर्णय लेने के पक्ष में नहीं है। इस मामले में शासन स्तर पर बैठकें हो रही हैं और विधिक राय ली जा रही है। इस बीच राष्ट्रीय पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन हाई कोर्ट के आदेश के विरुद्ध अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का निर्णय किया है।
संगठन, ओबीसी आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई ‘ट्रिपल टेस्ट’ की व्यवस्था को आधार बनाएगा। संगठन की अपील स्वीकार होने पर सरकार को भी विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव कराने से राहत मिल सकती है।
गुरुवार को प्रमुख सचिव पंचायती राज रविंद्र ने हाईकोर्ट के आदेश के संबंध में विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने बताया कि कोर्ट के 68 आदेश का विभिन्न स्तरों पर अध्ययन किया जा रहा है। ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी परीक्षण किया जा रहा है। विभागीय मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि कोर्ट के आदेश पर अभी विधिक राय ली जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर करेंगे अपील
दूसरी तरफ प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अखिलेश सिंह ने बताया कि हाई कोर्ट के आदेश पर संगठन सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करेगा। इसमें राज्यों के निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण के लिए ‘ट्रिपल टेस्ट’ का पूरी तरह पालन करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत राज्य सरकारों को निकायों में पिछड़ेपन की प्रकृति और प्रभाव की जांच के लिए समर्पित आयोग गठित करना है।
आयोग को निकायों में ओबीसी समाज के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक पिछड़ेपन से जुड़े आंकड़े जुटाकर सरकार को रिपोर्ट देनी होती है। जिसके आधार पर सरकार ओबीसी के लिए सीटों का आरक्षण तय करेगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में गठित समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग अभी 33 जिलों का भ्रमण नहीं कर पाया है। आयोग को रिपोर्ट देने में समय लगेगा। जल्दबाजी में रिपोर्ट नहीं तैयार होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद सरकार उठाएगी कदम
अपील में यह भी बताया जाएगा कि सरकार ने ग्रामीणों द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों को ही पंचायतों में प्रशासक की जिम्मेदारी दी है, इसलिए चुनाव जल्दबाजी में न कराए जाएं। माना जा रहा है कि प्रधान संगठन की अपील पर सुप्रीम कोर्ट का रुख देखने के बाद ही सरकार कोई कदम बढ़ाएगी।
उल्लेखनीय है कि समय से पंचायत चुनाव न कराए जाने पर विपक्षी दल लगातार सरकार को घेरते आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि सरकार जानबूझकर पंचायत चुनाव, विधानसभा चुनाव के पहले नहीं कराना चाहती है।
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