नवरात्र में उत्तर प्रदेश के 26 देवी मंदिरों में गूंजेंगे देवी गीत, कार्यक्रम पर खर्च होंगे 28 लाख रुपये
शारदीय नवरात्र में उत्तर प्रदेश के 24 जिलों के 26 प्रमुख देवी मंदिरों में मिशन शक्ति के तहत महिलाओं की सुरक्षा और स्वावलंबन का संदेश दिया जाएगा।

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HighLights
नवरात्र में 26 देवी मंदिरों में विशेष कार्यक्रम।
मिशन शक्ति के तहत नारी सुरक्षा का संदेश।
कार्यक्रमों पर 28 लाख रुपये का खर्च होगा।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। शारदीय नवरात्र में प्रदेश के 24 जिलों के 26 प्रमुख देवी मंदिरों में देवी गीतों और दुर्गा सप्तशती के पाठ के साथ महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन का संदेश भी दिया जाएगा। मिशन शक्ति के तहत 17 से 19 अक्टूबर तक इन मंदिरों में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
प्रदेश सरकार धार्मिक आयोजनों के जरिये नारी सम्मान और सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करेगी। इन कार्यक्रमों पर 28 लाख रुपये खर्च होंगे, जिसमें 23.40 लाख रुपये कलाकारों को मिलेंगे। सप्तमी, अष्टमी और नवमी में पारंपरिक देवी गायन और दुर्गा सप्तशती पाठ प्रमुख आकर्षण होंगे।
कार्यक्रमों के लिए मीरजापुर के मां विंध्यवासिनी मंदिर, बलरामपुर के देवीपाटन मंदिर, सीतापुर के नैमिषारण्य स्थित ललिता देवी मंदिर और सहारनपुर के शाकंभरी देवी मंदिर सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों को चुना गया है।
वाराणसी के विशालाक्षी देवी मंदिर, प्रयागराज के अलोपी देवी और ललिता देवी मंदिर, जौनपुर के मां शीतला चौकिया धाम, प्रतापगढ़ के बेल्हा देवी मंदिर और सोनभद्र के ज्वाला देवी मंदिर में भी कार्यक्रम होंगे।
इसके अलावा भदोही के सीता समाहित स्थल, कौशांबी के कदवासिनी मंदिर, मथुरा के कात्यायनी देवी मंदिर, उन्नाव के चंडिका देवी मंदिर, औरैया के देवकाली मंदिर, गोरखपुर के मां तरकुलहा देवी धाम और मऊ के मां शीतला माता स्थल को भी आयोजन के लिए चुना गया है।
चित्रकूट के शिवानी देवी मंदिर, हमीरपुर के गायत्री शक्ति पीठ, जालौन के कोंच स्थित बैरागढ़ माता मंदिर, कानपुर देहात के घाटमपुर स्थित कुष्मांडा देवी मंदिर, मैनपुरी के शीतला माता मंदिर, फिरोजाबाद के चामुंडा माता मंदिर, लखनऊ के चंद्रिका देवी और संकटा देवी मंदिर तथा फर्रुखाबाद के गुरुग्राम देवी मंदिर में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, इन आयोजनों का उद्देश्य नवरात्र की सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान तथा आत्मनिर्भरता का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है।
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