एमएलसी चुनाव से तय होगा 2027 का रिपोर्ट कार्ड, विधायकों के प्रदर्शन को भी टिकट का आधार बनाएगी भाजपा
भाजपा एमएलसी चुनावों को 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के रूप में देख रही है, जिसमें विधायकों का प्रदर्शन उनके ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
भाजपा एमएलसी चुनाव को 2027 की तैयारी मान रही।
विधायकों का प्रदर्शन 2027 विधानसभा टिकटों का आधार बनेगा।
युवा, बुद्धिजीवी वर्ग में पार्टी पकड़ मजबूत करेगी।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। चुनाव किसी भी स्तर पर हो, भाजपा सधी रणनीति के तहत पूरी ताकत झोंकती है। प्रदेश में शिक्षक एवं स्नातक खंड की 11 एमएलसी सीटों पर होने वाले चुनाव को पार्टी लोकसभा एवं विधान सभा चुनाव की तरह गंभीरता से लड़ रही है। सांसदों-विधायकों को अलग-अलग चुनावी मोर्चों पर लगाया गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने वाराणसी और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने लखनऊ और अयोध्या में साफ किया है कि एमएलसी चुनाव के दौरान विधायकों की कापी इस मानक पर भी जांची जाएगी कि उनके क्षेत्र में पार्टी का प्रदर्शन क्या रहा।
बेहतर परिणाम वाले विधायकों का टिकट पर दावा मजबूत रहेगा। वहीं, यह भी पता किया जाएगा कि युवा एवं बुद्धिजीवी वर्ग के बीच पार्टी की कितनी पकड़ है। बंगाल चुनाव के तत्काल बाद ही भाजपा ने एमएलसी चुनाव की रणनीति पर तेजी से काम किया। स्नातक खंड की पांच एवं शिक्षक खंड की छह सीटों पर 23 अक्टूबर को होने वाला चुनाव प्रदेश के 72 जिलों से गुजर रहा है। इन जिलों की विधान सभा सीटों पर भाजपा एवं प्रतिद्वंदियों को मिले वोटों से हवा का रुख पता चलेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जिन विधानसभाओं में जेनजी और युवा वर्ग में भाजपा की पकड़ मजबूत मानी जाएगी, वहां के जनप्रतिनिधियों के नंबर बढ़ेंगे।
भाजपा ने एमएलसी चुनाव के दृष्टिगत सभी ब्लाकों में एक-एक प्रभारी नियुक्त किया है। विधायकों, सांसदों व प्रदेश पदाधिकारियों को जिलों और कमिश्नरियों में लगाया गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन एवं प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े साफ कर चुके हैं कि हर बूथ सबसे मजबूत करना होगा। भले ही स्नातक एवं खंड शिक्षा क्षेत्र के चुनाव में विधान सभा की तरह ज्यादा मत नहीं पड़ते, लेकिन इससे एक नैरेटिव अवश्य बनता है।
भाजपा की रणनीति है कि चुनाव परिणामों के बहाने अखिलेश यादव के पीडीए की धार कुंद की जाए। 2020 में दस सीटों पर हुए एमएलसी चुनाव में भाजपा ने छह सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि हवा खिलाफ होने के बावजूद सपा को तीन सीटें मिलीं। इस बार सीटें बढ़ाने की कसरत में जुटी सपा ने भाजपा के कई नाराज चेहरों को अपने साथ जोड़ा है।
अयोध्या-गोरखपुर क्षेत्र शिक्षक खंड पर भाजपा के बागी संजयन सपा के टिकट पर मैदान में हैं। आगरा एवं प्रयागराज-झांसी खंड में भी कई पदाधिकारियों के बीच मतभेद उभरे हैं। इधर, राष्ट्रीय इकाई विधान सभा क्षेत्रों में सर्वे करवा रही है, जिसमें एमएलसी चुनाव में डयूटी दे रहे जनप्रतिनिधियों का फीडबैक भी लिया जा रहा है।
