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लखनऊ में अब सूरज की रोशनी से घूमेगी कुम्हारों की चाक, माटीकला बोर्ड पहली बार देगा सोलर चालित चाक

Published: Mon, 02 Nov 2026 08:06 AM (IST)

उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड कुम्हारों को पहली बार सौर ऊर्जा से चलने वाली चाक उपलब्ध कराएगा, जिससे बिजली खर्च कम ...और पढ़ें

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HighLights

  1. कुम्हारों को मुफ्त मिलेगी सौर ऊर्जा से चलने वाली चाक।

  2. बिजली खर्च घटेगा, उत्पादन क्षमता और आमदनी बढ़ेगी।

  3. माटीकला को आधुनिक तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भरता।

जितेंद्र उपाध्याय, लखनऊ। कभी हाथों के सहारे घूमने वाली कुम्हारों की चाक ने समय के साथ बिजली की मोटर का साथ पकड़ा और अब यह सूरज की रोशनी से चलेगी। मिट्टी को आकार देकर उसे संस्कृति, परंपरा और उपयोगिता से जोड़ने वाले कुम्हारों के हुनर को नई ऊर्जा देने की तैयारी है। उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड पहली बार कारीगरों को सोलर चालित चाक उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है। इससे कुम्हारों को बिजली के खर्च से राहत मिलेगी और उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ आमदनी में भी इजाफा होने की उम्मीद है।

अभी तक माटीकला बोर्ड की ओर से कारीगरों को बिजली से चलने वाली चाक वितरित की जाती थी, लेकिन इस बार परंपरागत कारोबार को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए सौर ऊर्जा से संचालित चाक देने का निर्णय लिया गया है। अगले वर्ष एक अप्रैल से इसके वितरण की शुरुआत होने की संभावना है। पहले चरण में राजधानी समेत प्रदेश के सभी जिलों के 1,700 कारीगरों को मुफ्त दिया जाएगा । इसके लिए मुख्यमंत्री रोजगार सज्जन योजना के तहत आनलाइन आवेदन करना होगा।


मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत करीब 32 हजार रुपये लागत वाली सोलर चाक कारीगरों को नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य कुम्हारों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ पारंपरिक माटीकला को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना है। सौर ऊर्जा से चाक चलने के कारण बिजली की खपत और उत्पादन लागत दोनों कम होंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता पर निर्भरता भी घटेगी।- एलके नाग, उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी, माटी कला बोर्ड

बर्तन बनाने से लेकर पकाने तक मिलेगी सुविधा

सोलर चाक की खासियत यह होगी कि इससे केवल मिट्टी के बर्तनों को आकार देने का काम ही नहीं होगा, बल्कि रोशनी के लिए बल्ब जलाने की सुविधा भी मिलेगी। इसके साथ कारीगरों को गैस से संचालित भट्ठी उपलब्ध कराने की भी योजना है। भट्ठी में आग को नियंत्रित करने और तापमान बनाए रखने के लिए इस्तेमाल होने वाला ब्लोअर भी सौर ऊर्जा से चलेगा।

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