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योगी सरकार बदलेगी अखिलेश गवर्नमेंट के समय की मदरसा नियमावली, मान्यता-पाठ्यक्रम को बनाया जाएगा सख्त और पारदर्शी

Published: Tue, 07 Apr 2026 07:00 AM (IST)

योगी सरकार पूर्व सपा सरकार की मदरसा नियमावली 2016 में बड़े बदलाव कर रही है। अब मान्यता के लिए न्यूनतम 5 कमरे, ऑफिस और खेल का मैदान अनिवार्य होगा।

सीएम योगी आद‍ित्‍यनाथ।- फाइल फोटो

सीएम योगी आद‍ित्‍यनाथ।- फाइल फोटो

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शोभित श्रीवास्तव, लखनऊ। योगी सरकार पूर्ववर्ती सपा सरकार में बनी उप्र मदरसा नियमावली, 2016 में बदलाव करने जा रही है। इसके तहत मान्यता, पाठ्यक्रम, शिक्षक भर्ती और निगरानी प्रणाली को और अधिक सख्त और पारदर्शी बनाया जा रहा है। अभी मदरसों की मान्यता के लिए अपना या लीज पर भवन होना जरूरी है, लेकिन कमरों की संख्या तय नहीं है। अब मान्यता के लिए न्यूनतम पांच कमरे, आफिस व खेल का मैदान अनिवार्य किया जाएगा।

अब तक कई ऐसे मदरसे सामने आ चुके हैं जो सीमित संसाधनों या कागजी रूप में संचालित हो रहे थे। ऐसे में सरकार नई नियमावली के जरिये इन पर अंकुश लगाने की तैयारी कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने मदरसों द्वारा उच्च शिक्षा के लिए दी जाने वाली कामिल (स्नातक) और फाजिल (परास्नातक) की डिग्रियों को असंवैधानिक ठहराया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने नए सिरे से मदरसा बोर्ड का पाठ्यक्रम तैयार कराने का निर्णय लिया था। मदरसा शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के लिए इसमें व्यावसायिक शिक्षा जोड़ी जाएगी। कामिल, फाजिल बंद होने से अब शिक्षकों की भर्ती की योग्यता भी नए सिरे से निर्धारित होनी है। इसी उद्देश्य से निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण की अध्यक्षता में गठित समिति की संस्तुतियां के आधार पर सरकार अब मदरसा नियमावली में संशोधन करने जा रही है।

मदरसा शिक्षकों को कक्षा एक से पांच अथवा कक्षा छह से आठ में उनकी विषयवार योग्यता चिह्नित कर उनका प्रशिक्षण दिलाने का प्रविधान नियमावली में करने की संस्तुति की गई है। उन्हें ब्रिज कोर्स कराकर आधुनिक विषयों से जोड़े जाने की भी बात है। मदरसा बोर्ड कक्षा नौ से 12 तक की कक्षाओं के लिए विषयों और पाठ्यक्रम का पुनर्निर्धारण भी करेगा।

मदरसे में छात्रों की संख्या के अनुरूप शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित करने और स्थानांतरण के लिए नीति-निर्धारण तथा छात्र/शिक्षक अनुपात के आधार पर विषयवार शिक्षकों का समायोजन के लिए नियम बनाए जा रहे हैं। मदरसा शिक्षा को मुख्यधारा से जोड़ने के तहत धार्मिक शिक्षा के साथ गणित, विज्ञान और सामाजिक विषयों को शामिल करते हुए एनसीइआरटी पाठ्यक्रम को और मजबूती से लागू करने की योजना है, ताकि छात्र प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं और रोजगार के अवसरों के लिए तैयार हो सकें।

शिक्षकों की नियुक्ति में प्रबंधतंत्र की मनमानी रुकेगी

अनुदानित मदरसों में शिक्षकों की नियुक्ति और योग्यता के लिए नियमावली में सख्त मानक बनाए जा रहे हैं ताकि प्रबंधतंत्र द्वारा मनमानी नियुक्तियों पर रोक लगाई जा सके। शिक्षकों की भर्तियां उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से कराने की तैयारी है। पारदर्शिता लाने के लिए आडिट और डिजिटल निगरानी तंत्र को भी मजबूत किया जा सकता है।

विश्वविद्यालय से संबद्ध कर दिलाई जाएगी कामिल-फाजिल की डिग्री

सरकार अब कामिल-फाजिल की डिग्री राज्य विश्वविद्यालयों से मदरसों को संबद्ध कर दिलाने पर विचार कर रही है। चूंकि मदरसा बोर्ड कामिल-फाजिल की डिग्री नहीं दे सकते हैं इसलिए सरकार इसके विकल्पों पर मंथन कर रही है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री के यहां हुई बैठक में इस पर सहमति भी बन गई है। यह भी विचार किया जा रहा है कि मदरसों को ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय लखनऊ से संबद्ध कर कामिल-फाजिल की डिग्री दिलाई जाए। 

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