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UP की नई पहचान: 'तमंचों' वाले अतीत को पीछे छोड़ लखनऊ बना 'ड्रोन शक्ति' का केंद्र

Published: Mon, 06 Apr 2026 02:15 PM (IST)

उत्तर प्रदेश, जो कभी अवैध हथियारों के लिए जाना जाता था, अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से 'ड्रोन शक्ति' ...और पढ़ें

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HighLights

  1. यूपी अब 'ड्रोन शक्ति' का नया केंद्र बना।

  2. लखनऊ के युवाओं ने 'दिव्यास्त्र एमके-1' यूएवी बनाया।

  3. 500 किमी रेंज, एआई-आधारित, सेना के लिए गेमचेंजर।

डिजिटल टीम, लखनऊ। उत्तर प्रदेश की छवि अब केवल कानून-व्यवस्था के सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह राज्य अब देश का 'डिफेंस टेक्नोलॉजी हब' बन चुका है। जिस प्रदेश को कभी अवैध हथियारों के लिए बदनाम किया जाता था, आज वहां के युवा 'दिव्यास्त्र' जैसे अत्याधुनिक यूएवी (UAV) बनाकर भारतीय सेना की ताकत बढ़ा रहे हैं। लखनऊ आधारित स्टार्टअप हॉवरिट (Hoverit) का यह इनोवेशन योगी सरकार की स्टार्टअप नीति और उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर की सफलता का जीता-जागता प्रमाण है।

दिव्यास्त्र MK-1: आधुनिक युद्ध का अचूक सारथी

तीन युवा उद्यमियों पवन, रविंद्र पाल सिंह और सौरभ सिंह द्वारा विकसित “दिव्यास्त्र एमके-1” एक ऐसा एडवांस ड्रोन है जो निगरानी और सटीक हमले (Precision Strike) दोनों में सक्षम है।

  • मारक क्षमता और रेंज: यह ड्रोन 500 किलोमीटर की विशाल रेंज तय कर सकता है और लगातार 5 घंटे तक हवा में रहकर दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख सकता है।

  • एआई आधारित टारगेटिंग: इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम लगा है, जो 10,000 फीट की ऊँचाई से भी 15 किलोग्राम तक का पेलोड (हथियार या रसद) लेकर सटीक निशाना साध सकता है।

  • किफायती समाधान: अपनी उन्नत तकनीक के बावजूद, इसकी निर्माण लागत अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध अन्य ड्रोन्स के मुकाबले काफी कम है।

डिफेंस कॉरिडोर में लगेगी 'ड्रोन फैक्ट्री'

स्टार्टअप की सफलता को देखते हुए अब इसे बड़े पैमाने पर विस्तार दिया जा रहा है। यूपी डिफेंस कॉरिडोर में कंपनी की नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की जा रही है:

  1. उत्पादन लक्ष्य: हर महीने 20 ड्रोन तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

  2. अगला पड़ाव (MK-2): कंपनी अब 'एमके-2' वर्जन पर काम कर रही है, जिसकी रेंज 2000 किलोमीटर और पेलोड क्षमता 80 किलोग्राम तक होगी।

  3. विविध रेंज: कंपनी ने 'आँख' (निगरानी), 'बाज' (सप्लाई), और 'VTOL' (बिना रनवे वाले) जैसे कई विशेष ड्रोन विकसित किए हैं।

सेना से मिले शुरुआती ऑर्डर

उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश अनुकूल नीतियों के कारण इस स्टार्टअप को न केवल तकनीकी सहयोग मिला, बल्कि भारतीय सेना से शुरुआती ऑर्डर भी प्राप्त हो चुके हैं। यह स्टार्टअप डिकॉय ड्रोन (दुश्मन को भ्रमित करने वाले) और आईएसआर (इंटेलिजेंस, सर्विलांस) यूएवी के माध्यम से देश की सीमाओं की सुरक्षा को एक पूरा 'ड्रोन ईकोसिस्टम' प्रदान कर रहा है।