उत्तर प्रदेश में पहली बार राज्य पशुधन मिशन: देसी गाय पालकों को मिलेगा लाभ, बकरी-भेड़ पालन को भी बढ़ावा
उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए राज्य पशुधन मिशन को मंजूरी ...और पढ़ें

HighLights
किसानों की आय बढ़ाने हेतु राज्य पशुधन मिशन स्वीकृत।
देशी गायों के पालन पर ₹40,000 तक अनुदान।
पशुधन बीमा प्रीमियम का 85% सरकार वहन करेगी।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। किसानों की आय बढ़ाने और पशुपालन को रोजगार व उद्यम का माध्यम बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने पहली बार राज्य पशुधन मिशन (स्टेट लाइवस्टाक मिशन) के गठन को स्वीकृति दी है।
इसके तहत पशुपालकों को आर्थिक सहायता देने, देशी गायों की नस्ल सुधारने, पशुधन उत्पादों का उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों को बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। मिशन के माध्यम से गाय पालन के साथ बकरी, मुर्गी, सुअर और भेड़ पालन को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
कैबिनेट ने दी मंजूरी
मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में इसके प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि उप्र पशुपालन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है, लेकिन कम उत्पादकता, बाजार की बिखरी व्यवस्था, मूल्य संवर्धन की कमी और कमजोर वितरण प्रबंधन जैसी चुनौतियां हैं।
राज्य पशुधन मिशन के तहत एक गाय पर 40 हजार रुपये और दो गायों पर कुल 80 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। पशुधन के बीमा के लिए प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 15 प्रतिशत पशुपालक को देना होगा।
देशी नस्लों के सुधार पर विशेष ध्यान
मिशन के तहत साहीवाल, गिर, हरियाणवी और गंगातीरी जैसी देशी नस्लों के संवर्धन और नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बकरी, मुर्गी, सुअर और भेड़ पालन को भी इसमें शामिल किया गया है। गरीब परिवारों को मुर्गी पालन के लिए चूजे उपलब्ध कराए जाएंगे। चयनित परियोजनाओं का अनुदान सीधे लाभार्थियों के खातों में जाएगा।
मिशन में पशुपालन आधारित उद्यमिता को पांच उप-मिशन के जरिये आगे बढ़ाया जाएगा। इसमें पशुधन उद्यमिता व स्टार्टअप विकास, पशुधन व पोल्ट्री नस्ल विकास, नवाचार व डिजिटल लाइवस्टाक, चारा व आहार विकास तथा अनुसंधान, वैश्वीकरण व ज्ञान प्रणाली विकास शामिल हैं। इनके माध्यम से लाइवस्टाक स्टार्टअप्स, चारा उत्पादन, मूल्य संवर्धन, उत्पादक संगठनों और सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा।
एआई, डिजिटल ट्रेसेबिलिटी और जलवायु अनुकूल तकनीकों से पशुधन उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार पहुंच बढ़ाने पर जोर रहेगा। प्रशिक्षण से पशुपालकों का कौशल विकास भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह राज्य वित्तपोषित योजना है। अवसंरचना निर्माण और सेवाओं के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) माडल को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
