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योगी सरकार की सख्त कानून-व्यवस्था का दिखा असर, महिलाओं को न्याय दिलाने में यूपी देश में अव्वल

Published: Fri, 08 May 2026 01:16 AM (IST)

उत्तर प्रदेश में 2024 के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराधों सहित कई प्रमुख अपराधों में गिरावट दर्ज की गई है।

महिलाओं को न्याय दिलाने में यूपी पहले स्थान पर, बंगाल में स्थिति खराब

 महिलाओं को न्याय दिलाने में यूपी पहले स्थान पर, बंगाल में स्थिति खराब

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राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2024 के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराध, डकैती, लूट और चोरी जैसे कई प्रमुख अपराधों में गिरावट दर्ज की गई है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के तीन वर्षीय तुलनात्मक आंकड़ों ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार की तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार अपहरण के मामलों में भी कमी आई है। वर्ष 2023 में दर्ज 14,272 मामलों की तुलना में 2024 में यह संख्या घटकर 5,306 रह गई, जो 62.8 प्रतिशत की गिरावट है।

वर्ष 2022 की तुलना में इसमें 64.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। हालांकि बंगाल की स्थिति चिंताजनक रही है। बंगाल में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में दोषसिद्धि दर मात्र 1.6 प्रतिशत दर्ज की गई है।

एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में दुुष्कर्म के मामले 3,516 से घटकर वर्ष 2024 में 3,209 रह गए। महिलाओं की हत्या के मामलों में भी 4.8 प्रतिशत की कमी आई है और संख्या 702 से घटकर 668 हो गई। साथ ही महिलाओं की अस्मिता पर हमला और छेड़छाड़ के मामलों में भी बड़ी गिरावट आई है।

वर्ष 2023 में इस प्रकार के 9,453 मामले दर्ज किए गए थे, जो वर्ष 2024 में घटकर 4,418 रह गए। राज्य में संचालित एंटी रोमियो स्क्वाड अभियान का भी असर रिपोर्ट में दिखाई दिया। इस अभियान के कारण वर्ष 2023 में छेड़छाड़ के 2,175 मामलों के मुकाबले 2024 में 4,418 मामले दर्ज किए गए।

वहीं घरेलू उत्पीड़न के मामलों में मामूली बढ़त दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में घरेलू उत्पीड़न के 21,266 मामले दर्ज किए गए।

महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामलों में सजा दिलाने में यूपी रहा आगे

महिलाओं के विरुद्ध हुए अपराधों में अपराधियों को सजा दिलाने के मामले में उत्तर प्रदेश आगे रहा है। वर्ष 2024 में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में उत्तर प्रदेश की दोषसिद्धि दर (कन्विक्शन रेट) 76.6 प्रतिशत दर्ज की गई है। वहीं दूसरी ओर बंगाल की स्थिति बेहद चिंताजनक रही है।

वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश की अदालतों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के कुल 3,52,664 मामले सुनवाई के लिए थे। इनमें से 27,639 मामलों की सुनवाई पूरी हुई और 21,169 मामलों में अपराधियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई।

वहीं कुल 27,743 मामलों का निपटारा कोर्ट में हो चुका है। यह संख्या पूरे देश में सबसे अधिक है। वहीं मिजोरम की दोषसिद्धि दर 87.8 प्रतिशत, कर्नाटक में 4.8 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 8.7 प्रतिशत, तेलंगाना में 14.8 प्रतिशत, केरल में 17 प्रतिशत, पंजाब में 19 प्रतिशत,तमिलनाडु में 23.4 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 29.6 व राजस्थान में 37.2 प्रतिशत दर्ज की गई।

यूपी में हैं महिलाओं के प्रति अपराधों के 92.1 प्रतिशत मामले लंबित

उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के 92.1 प्रतिशत मामले लंबित हैं। बंगाल में 96.6 प्रतिशत, बिहार में 97.9 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 95.4 प्रतिशत मामले लंबित हैं।

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