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यूपी में जनप्रतिनिधियों का फोन इग्नोर करना अब अधिकारियों को पड़ेगा महंगा, मुख्य सचिव ने जारी किए सख्त निर्देश

Published: Thu, 07 May 2026 11:02 PM (IST)

मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सांसदों व विधायकों के प्रति प्रोटोकॉल का पालन न करने वाले अधिकारियों को 16वां आदेश जारी कर कड़ी चेतावनी दी है।

15 आदेशों के बाद भी नहीं सुधरा जनप्रतिनिधियों के प्रति अधिकारियों का रवैया

15 आदेशों के बाद भी नहीं सुधरा जनप्रतिनिधियों के प्रति अधिकारियों का रवैया

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राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। आदेश पर आदेश होने के बावजूद सांसदों व विधायकों के प्रति शिष्टाचार व प्रोटोकॉल के पालन को लेकर अधिकारियों का रवैया सुधर नहीं रहा है।

वर्ष 2017 से इस वर्ष फरवरी तक 15 आदेश होने के बावजूद प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो रहा है। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने गुरुवार को 16वां आदेश जारी करते हुए सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, पुलिस महानिदेशक, मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने को कहा है।

मुख्य सचिव की ओर से जारी शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि अब तक इस विषय पर 15 बार शासनादेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद जनप्रतिनिधियों के फोन न उठाने और प्रोटोकॉल का पालन न करने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।

यह मामले विधानसभा, विधान परिषद और संसदीय समितियों तक में उठ रहे हैं, जिससे सरकार की छवि प्रभावित हो रही है। इसमें कहा गया है कि सांसदों और विधायकों के सीयूजी नंबर तथा उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए अन्य मोबाइल नंबर अधिकारियों को अपने फोन में सेव रखना अनिवार्य है।

यदि किसी कारणवश कॉल रिसीव न हो सके तो प्राथमिकता के आधार पर कॉल बैक किया जाए और संबंधित जनप्रतिनिधि को संदेश भेजकर अवगत कराया जाए।

सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जनप्रतिनिधियों के कार्यालय या बैठक में आने पर अधिकारी अपनी सीट से खड़े होकर उनका स्वागत करें, सम्मानपूर्वक बैठाएं तथा जल ग्रहण करने के लिए आग्रह करें। उनकी बातों को गंभीरता से सुनते हुए जनहित से जुड़े मामलों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया जाए।

मुख्य सचिव ने पत्र में साफ कहा है कि इन निर्देशों की अनदेखी उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली-1956 का उल्लंघन मानी जाएगी। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को इन आदेशों से अवगत कराते हुए हर स्तर पर अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी शिकायतें न मिलें।

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