विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'सरकार एक इकाई है, विभागों का अलग रुख मंजूर नहीं'; मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण सीमा से अधिक प्रवेश पर हाई कोर्ट नाराज

By Jagran NewsEdited By: Sachin Sharma
Published: Tue, 13 Oct 2026 07:49 AM (IST)Updated: Tue, 13 Oct 2026 08:06 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने अंबेडकरनगर समेत चार मेडिकल कॉलेजों में एससी अभ्यर्थियों को निर्धारित सीमा से अधिक ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. मेडिकल कॉलेजों में एससी आरक्षण सीमा उल्लंघन पर हाई कोर्ट नाराज।

  2. राज्य सरकार के दोहरे रुख पर न्यायालय ने जताई कड़ी आपत्ति।

  3. समाज कल्याण सचिव को अभिलेखों संग कोर्ट में पेश होने का आदेश।

विधि संवाददाता, लखनऊ। अंबेडकरनगर, कन्नौज, सहारनपुर और जालौन के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अनुसूचित जाति (एससी) के अभ्यर्थियों को निर्धारित सीमा से अधिक आरक्षण देकर प्रवेश देने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार के रुख पर कड़ी नाराजगी जताई है।

न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव को संबंधित अभिलेखों के साथ मंगलवार को न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले वर्ष आश्वासन दिया था कि शैक्षिक सत्र 2026-27 से उत्तर प्रदेश शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए आरक्षण अधिनियम, 2006 का पालन किया जाएगा।

इसके बावजूद मौजूदा सत्र में निर्धारित सीमा से अधिक आरक्षण देकर प्रवेश दिए जाने का मामला सामने आया है। अधिनियम के तहत अनुसूचित जाति के लिए 21 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए दो प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित है।

इस तरह कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि समाज कल्याण विभाग पिछले वर्ष अदालत में दिए गए आश्वासन से सहमत नहीं था। इस पर पीठ ने सवाल उठाया कि यदि विभाग की सहमति नहीं थी तो सरकार ने न्यायालय को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी।

पिछले सत्र में अदालत के आदेश का लाभ लेने के बाद अब अलग रुख अपनाने पर भी सवाल किए गए। पीठ ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार एक इकाई है। विभिन्न विभागों के अलग-अलग रुख के आधार पर न्यायालय के आदेशों की अवहेलना नहीं की जा सकती। अदालत ने मामले से संबंधित पुराने अभिलेख भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

यह भी पढ़ें- इलाहाबाद हाई कोर्ट की बड़ी उपलब्धि, 1 लाख फैसलों का हिंदी अनुवाद किया पूरा