यूपी के सरकारी स्कूलों को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, अब नियमों का चक्कर खत्म, डेवलपमेंट के लिए सीधे मिलेंगे पैसे
उत्तर प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अब विकास कार्य स्कूल की वास्तविक जरूरत के आधार पर होंगे, न कि ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में विकास कार्य अब वास्तविक जरूरत पर आधारित।
प्रधानाचार्य सीधे डीआइओएस को प्रस्ताव भेजकर प्रक्रिया सरल करेंगे।
प्रोजेक्ट अलंकार के तहत 19 प्रकार की सुविधाओं का विकास होगा।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अब विकास कार्य किसी तय भारांक के आधार पर नहीं, बल्कि स्कूल की वास्तविक जरूरत देखकर तय होंगे। शासन ने प्रोजेक्ट अलंकार में लागू भारांक आधारित प्राथमिकता व्यवस्था खत्म कर दी है।
नई व्यवस्था में प्रधानाचार्य या प्रधानाध्यापक स्कूल की जरूरत का आकलन कर जर्जर भवन के पुनर्निर्माण, मरम्मत और अन्य सुविधाओं के लिए प्रस्ताव सीधे जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) को भेजेंगे। इससे जरूरी कामों के प्रस्ताव तैयार करने और उन्हें मंजूरी मिलने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले सरल होने की उम्मीद है।
डीआइओएस प्रस्ताव के आधार पर संबंधित कार्यदायी संस्था से इस्टीमेट तैयार कराएंगे। इसके बाद प्रस्ताव जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति के सामने रखा जाएगा। समिति में जिलाधिकारी अध्यक्ष, मुख्य विकास अधिकारी उपाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता तकनीकी सदस्य और डीआइओएस सदस्य सचिव होंगे।
प्रोजेक्ट में होंगे ये काम
समिति की स्वीकृति के बाद प्रस्ताव और इस्टीमेट शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) को भेजे जाएंगे। जांच के बाद धन आवंटन के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। प्रोजेक्ट अलंकार के तहत स्कूलों में 19 तरह की सुविधाओं के काम कराए जा सकेंगे। इनमें स्वच्छ पाइप पेयजल, बालक-बालिकाओं के अलग शौचालय, अतिरिक्त कक्ष, प्रयोगशाला, खेल मैदान, बैडमिंटन व वालीबाल कोर्ट, ओपन जिम, बाउंड्रीवाल व गेट, मल्टीपरपज हाल, साइकिल स्टैंड, स्मार्ट क्लास, पुस्तकालय, सोलर प्लांट और रेनवाटर हार्वेस्टिंग शामिल हैं।
यह भी पढ़ें- यूपी में बनेंगे 35 रोड-फ्लाईओवर और बाईपास, आगरा-रामपुर सहित इन जिलों की सड़कों का होगा चौड़ीकरण
इसके साथ बालक व बालिका टायलेट, दिव्यांग शौचालय, सामूहिक हैंडवाशिंग यूनिट, कक्षों में टायल लगाने, प्रधानाचार्य कक्ष व स्टाफ रूम और नल के पानी की सुविधा वाली रसोई भी बनाई जा सकेगी। स्कूल की जरूरत होने पर प्रधानाचार्य इनके अलावा अन्य जरूरी कार्यों का प्रस्ताव भी दे सकेंगे।
यह भी पढ़ें- यूपी के सभी सरकारी कर्मचारियों को पूरे करने होंगे दो कोर्स, मुख्य सचिव ने जारी किया आदेश
माध्यमिक शिक्षा विभाग की किंजल सिंह के आदेश के अनुसार प्रोजेक्ट अलंकार से जुड़े वर्ष 2021 और 2023 के पुराने शासनादेशों में दी गई व्यवस्था को खत्म कर नई प्रक्रिया लागू की गई है। पुरानी प्रक्रिया में अधिक औपचारिकताओं के कारण स्कूलों से प्रस्ताव समय पर नहीं मिल पाते थे और धन आवंटन में देरी होती थी।
