अब यूपी में जंगलों में लगी चेनलिंक और सोलर फेंसिंग का होगा ऑडिट, IFS अधिकारियों की टीम करेगी जांच
उत्तर प्रदेश वन विभाग अब जंगलों के बाहरी हिस्सों में लगी चेनलिंक और सोलर फेंसिंग का ऑडिट कराएगा। इसका उद्देश्य ...और पढ़ें

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HighLights
वन्यजीवों के हमलों और आबादी में प्रवेश पर कमी का आकलन।
आईएफएस अधिकारी करेंगे स्थलीय जांच और गुणवत्ता परीक्षण।
मानव-वन्यजीव संघर्ष के आंकड़ों का होगा तुलनात्मक अध्ययन।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। वन्यजीवों के जंगल से बाहर निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने और हमले की घटनाओं को रोकने के लिए जंगलों के बाहरी हिस्सों में लगाई गई चेनलिंक व सोलर फेंसिंग का अब विभाग आडिट कराएगा। वन विभाग यह पता लगाएगा कि जिन क्षेत्रों में फेंसिंग कराई गई है, वहां वन्यजीवों के हमले और आबादी में उनके पहुंचने की घटनाओं में कितनी कमी आई है।
यह भी देखा जाएगा कि फेंसिंग अपनी मूल मंशा में कितनी सफल रही है। इसके लिए वन विभाग ने अपने अफसरों को जिम्मेदारी दी है। इसके लिए भारतीय वन सेवा (आइएफएस) अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जा रही है। अधिकारी मौके पर जाकर फेंसिंग की स्थिति, उसकी लंबाई, गुणवत्ता, रखरखाव और संवेदनशील स्थानों पर उसकी उपयोगिता की पड़ताल करेंगे।
आंकड़ों का भी होगा तुलनात्मक अध्ययन
यह भी देखा जाएगा कि कहीं फेंसिंग क्षतिग्रस्त तो नहीं हो गई है या वन्यजीवों के निकलने के लिए उसमें कोई रास्ता तो नहीं बन गया है। आडिट में केवल फेंसिंग की भौतिक स्थिति ही नहीं देखी जाएगी, बल्कि फेंसिंग लगाए जाने से पहले और उसके बाद के आंकड़ों का भी तुलनात्मक अध्ययन होगा।
संबंधित क्षेत्रों में बाघ, तेंदुआ, हाथी अथवा अन्य वन्यजीवों के आबादी में आने की घटनाएं, मानव पर हमले, पशुधन के शिकार और वन्यजीवों की आवाजाही से जुड़े मामलों का रिकार्ड खंगाला जाएगा।ॉ
इससे यह पता लगाने का प्रयास होगा कि फेंसिंग वाले इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में वास्तव में कमी आई है या नहीं। यदि किसी क्षेत्र में फेंसिंग के बावजूद घटनाएं जारी हैं तो उसके कारणों की भी पहचान की जाएगी। स्थलीय जांच के दौरान फेंसिंग में टूट-फूट, जंग, नीचे से बने रास्ते, पानी की निकासी के स्थान और ऐसे अन्य हिस्सों की पहचान की जाएगी, जहां से वन्यजीव आसानी से बाहर निकल सकते हैं।
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जंगल की सीमा और आबादी के बीच फेंसिंग की प्रभावशीलता भी देखी जाएगी। प्रदेश में कुल 231 किलोमीटर चेनलिंक व 41 किलोमीटर सोलर फेंसिंग लगी है। इनकी उपयोगिता को लेकर एक अध्ययन भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून से भी कराया जा रहा है, किंतु इसमें समय ज्यादा लगने के कारण विभाग अपने स्तर से आडिट कराने जा रहा है।
