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यूपी में खान-पान की गुणवत्ता पर कड़ा पहरा, होटल-रेस्तरां में सफाई से लेकर तेल निस्तारण तक का रखना होगा रिकॉर्ड

Published: Sun, 04 Oct 2026 12:28 AM (IST)

उत्तर प्रदेश में अब होटल, रेस्तरां और ठेलों पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।

यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।

HighLights

  1. होटल, रेस्तरां में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर कड़ी निगरानी।

  2. सफाई, तापमान, तेल निस्तारण के रिकॉर्ड प्रदर्शित करना अनिवार्य।

  3. नियमों की अनदेखी पर प्रतिष्ठान सील, लगेगा जुर्माना।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। होटल, रेस्तरां और ठेलों पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की अब कड़ी निगरानी होगी। खाद्य सामग्री किस तापमान पर रखी गई, किचेन की सफाई और कीट नियंत्रण कब हुआ, पानी व खाद्य तेल की जांच कब हुई और कच्चे-पके भोजन को अलग रखा गया या नहीं, इसका रिकार्ड खाद्य कारोबारियों को ग्राहक के सामने प्रदर्शित करना होगा। इसकी अनदेखी पर प्रतिष्ठान को सील कर दिया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जाएगा।

मिलावटी खाने से स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने शनिवार को इसके लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। इसमें कहा गया है कि प्रत्येक खाद्य कारोबारी को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) से लाइसेंस लेना और उसे प्रतिष्ठान के प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करना होगा। ग्राहकों की शिकायत के लिए ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ एप का क्यूआर कोड प्रदर्शित करना होगा।

खाद्य प्रतिष्ठान में पर्याप्त रोशनी, वेंटिलेशन, जल निकासी और हाथ धोने की सुविधा होनी चाहिए। खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने वाले बर्तन और उपकरण जंगरोधी तथा आसानी से साफ होने वाले होने चाहिए। घर ले जाने और पहुंचाने वाली पैकेजिंग खाद्य-ग्रेड की होगी और उस पर शाकाहारी या मांसाहारी चिह्न स्पष्ट रहेगा। जमे खाद्य पदार्थों को माइनस 18 डिग्री और ठंडे खाद्य पदार्थों को पांच डिग्री से कम तापमान पर रखना होगा।

किचेन, उपकरण और खाद्य-संपर्क वाली सतहों की नियमित सफाई का रिकार्ड रखना होगा। खाद्य अपशिष्ट अलग कर ढक्कन वाले कूड़ेदान में डालना होगा। खाद्य तेल का निस्तारण अधिकृत एजेंसी से कराना होगा। भोजन बनाने वाले कर्मचारियों को बाल ढकने का जाल, दस्ताने और एप्रन पहनना होगा। संक्रामक, त्वचा रोग से पीड़ित व्यक्ति को खाद्य कार्य से दूर रखना होगा। मेन्यू में इस्तेमाल खाद्य तेल की जानकारी देनी होगी। डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों और मेन्यू में अनुमत योजक, कृत्रिम रंग, कृत्रिम मिठास और एलर्जी पैदा करने वाले घटकों की जानकारी देनी होगी।

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