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यूपी में 20 प्रतिशत तक महंगी हो सकती है बिजली, उपभोक्‍ताओं की जेब पर पड़ेगा बड़ा असर

Published: Fri, 06 Feb 2026 09:39 PM (IST)

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों के वार्षिक राजस्व आवश्कता (एआरआर) प्रस्ताव स्वीकार कर लिए हैं। कंपनियों द्वारा ...और पढ़ें

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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली की दरों के निर्धारण की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों द्वारा दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्कता (एआरआर) संबंधी प्रस्ताव शुक्रवार को स्वीकार कर लिया है।

आयोग ने बिजली कंपनियों से श्रेणीवार बिजली दर संबंधी प्रस्ताव भी सौंपने के लिए कहा है। कंपनियों ने एआरआर के साथ टैरिफ प्रस्ताव न दाखिल कर बिजली की दरों में बढ़ोतरी करने का निर्णय फिलहाल आयोग पर छोड़ दिया था। हालांकि, कंपनियों द्वारा एआरआर में मौजूदा दरों से दिखाए गए घाटे (राजस्व गैप) की भरपाई करने के लिए औसतन 20 प्रतिशत तक बिजली अप्रैल से महंगी हो सकती है।

सभी बिजली कंपनियों ने पिछले वर्ष 28 नवंबर को आयोग में 1,18,741 करोड़ रुपये का एआरआर दाखिल किया था। इसमें बिजली खरीद के लिए ही लगभग 85,305 करोड़ रुपए और स्मार्ट प्रीपेड मीटर के संचालन के लिए 3837 करोड़ रुपए रखे गए हैं। कंपनियों ने सरकार से सब्सिडी के तौर पर 17,100 करोड़ रुपए मिलने के बावजूद 12,453 करोड़ रुपए का घाटा दिखाया है।

वैसे तो जितना घाटा दिखाया गया है उसकी भरपाई के लिए वर्तमान बिजली दर में लगभग 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है लेकिन कंपनियों ने अपनी ओर से बिजली दर बढ़ाने संबंधी टैरिफ प्रस्ताव आयोग में अब तक दाखिल नहीं किया है। माना जा रहा है कि इस वर्ष पंचायत और फिर अगले वर्ष के शुरूआत में विधानसभा चुनाव को देखते हुए बिजली दर संबंधी प्रस्ताव न दाखिल कर आयोग पर उसे छोड़ दिया गया है। एआरआर प्रस्ताव में पूर्व की भांति लगभग 13.07% वितरण हानियां रहने का अनुमान लगाया गया है। निजी क्षेत्र की नोएडा पावर कंपनी का एआरआर प्रस्ताव भी आयोग ने स्वीकार कर लिया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले छह वर्ष से राज्य में बिजली की दरें यथावत बनी हुई हैं। नियमानुसार एआरआर स्वीकारते ही आयोग को अधिकतम 120 दिनों में बिजली की दरों का निर्धारण करना होता है। एआरआर स्वीकारने के साथ ही आयोग ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि तीन दिन में एआरआर संबंधी आंकड़े समाचार पत्रों में प्रकाशित कराएं। उस पर उपभोक्ताओं आदि के द्वारा 21 दिनों में आपत्तियां-सुझाव दाखिल की जा सकेंगी। मार्च में आयोग प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों के क्षेत्र में जाकर बिजली की दर निर्धारण के लिए विधिवत सुनवाई करेगा।


एआरआर मनगढ़ंत, सस्ती हो बिजली



उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने एआरआर को पूरी तरह से मनगढ़ंत आंकड़ों पर बताते हुए कहा है कि केंद्र सरकार और ऊर्जा मंत्री एके शर्मा पहले ही कर चुके हैं कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर का खर्च उपभोक्ताओं पर नहीं डाला लेकिन कंपनियां इसका खर्च उपभोक्ताओं पर डालना चाहती है।

इससे बिजली दर बढ़ाने को गलत बताते हुए वर्मा ने कहा कि आयोग द्वारा अब तक लगभग 51 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा उपभोक्ताओं का सरप्लस बिजली कंपनियों पर निकाला जा चुका है। ऐसे में पांच वर्षों तक प्रत्येक वर्ष आठ प्रतिशत बिजली दरों में कमी होनी चाहिए। परिषद अध्यक्ष ने कहा कि पिछले वर्ष की तरह अगले वित्तीय वर्ष में भी बिजली महंगी नहीं होने देंगे।

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