लखनऊ में क्या अब भी बिक रहा है चाइनीज मांझा? पतंग की दुकानों का कुछ ऐसा है नजारा
पतंग के मांझे से हुई मौतों के बाद लखनऊ में पुलिस की सख्ती का असर दिखा। शुक्रवार को पतंग की ...और पढ़ें

HighLights
पुलिस की सख्ती से पतंग की दुकानें सूनी रहीं।
दुकानों पर चाइनीज मांझा नहीं मिला, पुलिस ने जांच की।
जानलेवा चाइनीज मांझे की ऑनलाइन बिक्री जारी है।
जागरण टीम, लखनऊ। पतंग के मांझे से हुई मौत और फिर पुलिस की चौकसी का असर शुक्रवार को राजधानी में नजर आया।सामान्य पतंगबाज भी पतंग लेने नहीं आए। दुकानों पर भी चरखी मेंं मांझा लपेटते नजर आए। हुसैनगंज में हाजी फरहान अहमद की दुकान पर सन्नाटा था।
करीब 50 साल पुरानी दुकान पर मौजूद फरहान ने बताया कि राजधानी में पतंग की दुकानों पर चाइनीज मांझा नहीं मिलता। पुलिस आई थी और मांझे को चेक किया। सबकुछ सही था। डालीगंज में हरी मस्जिद के पास भी दुकान पर कुछ लोग पतंग खरीद रहे थे, लेेकिन दुकानदार में दहशत थी।
रानीगंज के निवासियों ने बताया कि पहले यहां मांझा बिकता था, लेकिन पिछले एक साल से दुकान बंद है। पाबंदियों के बावजूद चाइनीज मांझे की बिक्री अब आनलाइन हो रही है। राजधानी में इलाहबाद व बरेली का बना मांझा सआदतगंज, कैंपवेल रोड, बीबीगंज, अंरगंज, मोअज्जमनगर, चौपटिया, यहियागंज, चौक, बालागंज, ठाकुरगंज समेत कई इलाकों में मिलता है।
टूटता नहीं खिंचता चला जाता है चाइनीज मांझा
लखनऊ पतंग विक्रेता एसोसिएशन अध्यक्ष अब्दुल हमीद ने बताया कि चाइनीज मांझा नायलान प्लास्टिक से बना होता है। ऊपर से इस प्लास्टिक के मांझे पर कांच व लोहे का बुरादा लगा होता है, जिससे इसकी धार बहुत पैनी होती है और मांझा टूटने के बजाय खिंचता चला जाता है, लेकिन टूटता नहीं है। यहीं जानलेवा होता है। जमघट और रक्षाबंधन पर करीब 130 छोटी बड़ी दुकानों पर मांझा व पतंगे बिकती हैं। स्थाई दुकानें मात्र 30 से 40 के बीच हैं।
