राज्यपाल का एक आईडिया और शुरू हो गई ODOP योजना, ऐसे शुरू हुआ यूपी दिवस का सफर
पूर्व राज्यपाल राम नाईक के सुझाव पर यूपी दिवस की शुरुआत हुई, जिसके बाद 2018 में 'एक जिला, एक उत्पाद' ...और पढ़ें

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HighLights
यूपी दिवस की शुरुआत पूर्व राज्यपाल राम नाईक के सुझाव पर हुई।
'एक जिला, एक उत्पाद' योजना 2018 में मुख्यमंत्री योगी ने शुरू की।
'एक जिला, एक व्यंजन' योजना स्थानीय खानपान को बढ़ावा दे रही है।
विकास मिश्र, लखनऊ। राज्य में वर्ष 2017 से पहले यूपी दिवस मनाने की परंपरा नहीं थी। तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष प्रदेश का स्थापना दिवस मनाने का सुझाव रखा था। इसके बाद 24 जनवरी 1950 को यूनाइटेड प्रोविंस से उत्तर प्रदेश बनने की अधिसूचना को आधार बनाकर पहली बार यूपी दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।
24 जनवरी 2018 को प्रदेश में पहला यूपी दिवस आयोजित किया गया। पहले यूपी दिवस के आयोजन की जिम्मेदारी सूचना विभाग को दी गई थी। मुख्यमंत्री का विचार था कि हर जनपद में हाथ से तैयार होने वाले उत्पाद, हस्तशिल्प और हथकरघा को प्रोत्साहित कर उन्हें उस जिले की पहचान बनाया जाए। इसी सोच के साथ वर्ष 2018 में 'एक जिला, एक उत्पाद' योजना की शुरुआत की गई, जिसका परिणाम आज सबके सामने है।
दैनिक जागरण की ओर से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दो दिवसीय 'एक जिला, एक व्यंजन' (ओडीओसी) प्रदर्शनी के दूसरे दिन गुरुवार को एक जिला एक व्यंजन योजना की सोच, विस्तार और लाभ विषय पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने अपने विचार रखे। बातचीत को दैनिक जागरण लखनऊ के संपादकीय प्रभारी अंबिका वाजपेयी ने आगे बढ़ाया।
अवनीश अवस्थी ने कहा, इस बार मुख्यमंत्री ने प्रदेश की ऐसी विशिष्ट पहचान को आगे बढ़ाने का फैसला किया, जो सीधे लोगों की संस्कृति और जीवनशैली से जुड़ी हो। इसमें खानपान सबसे अहम है। हर जिले के अपने खास व्यंजन हैं, जो वहां की परंपरा, संस्कृति और स्थानीय पहचान को दर्शाते हैं। इसी सोच के साथ 'एक जिला, एक व्यंजन' योजना शुरू की गई। योजना को अंतिम रूप देने से पहले सीएम ने कई स्तर पर चर्चा की।
कई जिलों के डीएम से प्रस्ताव मंगाए गए और एमएसएमई विभाग के स्तर पर उनका परीक्षण किया गया। काफी मंथन के बाद योजना को लागू किया गया। संवाद के दौरान अवनीश अवस्थी ने लोगों से प्रदेश के अलग-अलग जिलों के विशिष्ट व्यंजनों के बारे में भी पूछा। इस पर लखनऊ की टिक्की और मक्खन मलाई, बाराबंकी की चंद्रकला और कानपुर के बुकनू का जिक्र हुआ।
उन्होंने कहा कि कई ऐसे पारंपरिक व्यंजन हैं, जिनके बारे में दूसरे जिलों के लोग नहीं जानते। ओडीओसी के माध्यम से इन व्यंजनों को व्यापक पहचान दिलाई जा सकेगी। उन्होंने चंद्रकला जैसी पारंपरिक मिठाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय व्यंजनों की पहचान को बढ़ावा देना जरूरी है। कार्यक्रम में उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने-अपने जिले के खास व्यंजनों को पहचानें और उनके प्रचार-प्रसार में भागीदारी करें।
ओडीओपी से कारीगरों को मिला आर्थिक संबल
अवनीश अवस्थी ने कहा कि ओडीओपी की शुरुआत से अब तक इसकी लंबी यात्रा रही है। योजना के माध्यम से स्थानीय कारीगरों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बैंक ऋण उपलब्ध कराने के साथ उनके उत्पादों को बाजार और निर्यात से जोड़ने का काम किया गया।
उत्तर प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक पहचान मिली है। इसकी सफलता को देखते हुए केंद्र सरकार और दूसरे राज्यों ने भी इस तरह की पहल अपनाई। रेलवे ने 'एक स्टेशन, एक उत्पाद' योजना शुरू की। उत्तर प्रदेश इस योजना को आगे बढ़ाने में अग्रणी राज्य रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सोच और दूरदर्शिता के साथ इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
विश्वकर्मा श्रम सम्मान से मजबूत हुए कारीगर
अवनीश अवस्थी ने बताया कि वर्ष 2019 में यूपी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कारीगरों को मजबूत बनाने के लिए विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना शुरू की। इसके तहत पारंपरिक कामगारों को आधुनिक उपकरणों से युक्त टूलकिट उपलब्ध कराई जाती है। इससे कारीगरों की कार्यक्षमता मजबूत करने और उनके पारंपरिक हुनर को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
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बाद में केंद्र सरकार ने भी इस तरह की योजना लागू की। उन्होंने दैनिक जागरण का आभार जताते हुए कहा कि अखबार हमेशा समाज और जमीनी स्तर से जुड़े मुद्दों को उठाता रहा है। सरकार की अच्छी पहल को जन-जन तक पहुंचाने में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
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