उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में खुलेंगे AI केंद्र, पांच लाख युवाओं को मिलेगी ट्रेनिंग; योगी कैबिनेट से मिली मंजूरी
उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी 75 जिलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) केंद्र खोलने को मंजूरी दी है, जिसके तहत पांच लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।

लखनऊ के लोकभवन में मंत्रिपरिषद की बैठक करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
HighLights
सभी 75 जिलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केंद्र खुलेंगे।
पांच लाख युवाओं को एआई का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यूपी एआई मिशन को 225 करोड़ रुपये का बजट मिला।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश के सभी 75 जिलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) केंद्र खोले जाएंगे। इनके माध्यम से पांच लाख युवाओं को एआई का प्रशिक्षण देने, 50 हजार विशेषज्ञ तैयार करने और 100 से अधिक एआई आधारित समाधान विकसित करने का लक्ष्य है। साथ ही 100 स्टार्टअप को आर्थिक और अन्य सहायता दी जाएगी।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश एआई मिशन (यूपी-एआईएम) की स्थापना, क्रियान्वयन और संचालन को मंजूरी दी गई। इसके लिए 225 करोड़ रुपये का बजट प्रविधान किया गया है।
मिशन का उद्देश्य सरकारी कामकाज में एआई का उपयोग बढ़ाकर सेवाओं को तेज, सरल और प्रभावी बनाना है। इसके लिए यूपी एआई स्टैक नाम से साझा डिजिटल प्लेटफार्म विकसित किया जाएगा।
इस पर विभागों को एआई के लिए तैयार आंकड़े, सुरक्षित तरीके से डाटा साझा करने की सुविधा, समाधान विकसित करने के उपकरण और ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) आधारित कंप्यूटिंग क्षमता मिलेगी।
जिला लेवल पर होगा सुविधाओं का विस्तार
मिशन के तहत सात क्षेत्रों में काम होगा। इनमें साझा एआई प्लेटफॉर्म, डाटा व एआई सेवाएं, कौशल विकास, शोध एवं उत्कृष्टता केंद्र, स्टार्टअप व एमएसएमई को प्रोत्साहन, कंप्यूटिंग एवं डिजिटल ढांचा, सुरक्षित एआई का उपयोग और जिला स्तर पर सुविधाओं का विस्तार शामिल है।
कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा सहित विभिन्न विभागों की जरूरतों के अनुसार एआई समाधान विकसित किए जाएंगे। यूपीजीपीटी के माध्यम से सरकारी कामकाज में सहायता मिलेगी और नागरिकों को उनकी क्षेत्रीय भाषा में सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
एआई सेंटर आफ एक्सीलेंस के माध्यम से शोध परियोजनाओं, नवाचार प्रतियोगिताओं और हैकाथन को बढ़ावा दिया जाएगा। मिशन आइटी एवं इलेक्ट्रानिक्स विभाग के अंतर्गत स्वतंत्र सोसाइटी के रूप में स्थापित होगा। इसके संचालन के लिए शीर्ष निकाय, गवर्निंग बाडी और कार्यकारी समिति गठित की जाएगी।
प्रत्येक जिले में एआई फेलो, 200 से अधिक कौशल लैब
हर जिले में जिला एआई केंद्र होगा और मुख्यमंत्री एआई फेलोशिप के तहत एक-एक एआई फेलो चुना जाएगा। इन्हें एक वर्ष के लिए 40 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय है। फेलोशिप का हर वर्ष नवीनीकरण भी होगा।
आईटीआई, पॉलिटेक्निक, विश्वविद्यालयों और इंजीनियरिंग कॉलेजों में 200 से अधिक एआई कौशल लैब स्थापित की जाएंगी। इनमें एआई, डाटा साइंस और रोबोटिक्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर एक लाख तकनीकी शिक्षार्थियों को प्रमाणित करने का लक्ष्य है।
यह भी पढ़ें- उत्तर प्रदेश की आंगनबाड़ी वर्कर्स को हर साल मिलेगी साड़ी, योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला
