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सोलर ऊर्जा से जगमगाएंगे यूपी के आयुष अस्पताल, ओपीडी, पानी की मोटरों को मिलेगी निर्बाध बिजली  

Published: Wed, 07 Oct 2026 06:55 AM (IST)

उत्तर प्रदेश के करीब 2200 आयुष अस्पतालों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाएंगे, जिससे बिजली कटौती की समस्या कम होगी। ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

HighLights

  1. 2200 आयुष अस्पतालों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगेंगे।

  2. 80% बिजली सौर ऊर्जा से पूरी करने का लक्ष्य।

  3. ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। आयुष अस्पतालों में बिजली कटौती से मरीजों और तीमारदारों को होने वाली परेशानी कम होगी। प्रदेश के करीब 2200 आयुष चिकित्सालयों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की तैयारी है। योजना के तहत अस्पताल की जरूरत की करीब 80 प्रतिशत बिजली सौर ऊर्जा से पूरी करने का लक्ष्य है। इससे दिन में ग्रिड पर निर्भरता घटेगी और बिजली बिल कम होने की संभावना है।

प्रदेश में आठ आयुष मेडिकल कालेज सहित करीब 2200 आयुष चिकित्सालय और छोटे क्लीनिक हैं। पहले चरण में बिस्तरों की संख्या और बिजली की जरूरत के आधार पर 15 से 25 किलोवाट क्षमता के संयंत्र लगाने का प्रस्ताव है। कम बिस्तरों वाले चिकित्सालयों में 15 किलोवाट और अधिक बिस्तरों वाले अस्पतालों में 25 किलोवाट तक के संयंत्र लगाए जाएंगे। ओपीडी, वार्ड, पंखे, पानी की मोटर और जरूरी चिकित्सा उपकरणों की बिजली खपत के आधार पर क्षमता तय होगी।

इसका लाभ खासकर ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के चिकित्सालयों में मिलेगा, जहां कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति नियमित नहीं रहती। दिन में सौर बिजली मिलने से वाह्य रोग विभाग (ओपीडी) और वार्ड की जरूरी सेवाएं चलाने में मदद मिलेगी। रात और मौसम खराब होने पर ग्रिड की बिजली का इस्तेमाल किया जाएगा।

योजना के क्रियान्वयन के लिए निदेशक आयुर्वेद को नोडल अधिकारी बनाया गया है। वह स्थल चयन, छत की उपयुक्तता और संयंत्र की क्षमता का अंतिम निर्धारण कराने के साथ स्थापना कार्य की निगरानी करेंगे। संयंत्र लगाने से पहले छत की मजबूती, धूप और सुरक्षा मानकों की जांच होगी। संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय और काम की गुणवत्ता की भी निगरानी की जाएगी।

आयुष मिशन के निदेशक गौरी शंकर प्रियदर्शी ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही हैं। आयुष अस्पतालों में उपलब्ध स्थान का उपयोग संयंत्र लगाने के लिए किया जाएगा। इससे बिजली की बचत होगी और अस्पतालों के खर्च में कमी आएगी। उन्होंने बताया कि जल्द ही संयंत्र लगाने की प्रक्रिया शुरू होगी।

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