लखनऊ में सुरक्षाकर्मी की हत्या की साजिश: गिरफ्तार आतंकियों की कस्टडी रिमांड के लिए आज अर्जी देगी UP ATS
उत्तर प्रदेश एटीएस लखनऊ में पुलिस या सैन्यकर्मी की हत्या की साजिश रचने वाले गिरफ्तार आरोपितों की पुलिस कस्टडी रिमांड ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। राजधानी लखनऊ में पुलिस या सैन्यकर्मी की हत्या कर उसका वीडियो पाकिस्तान भेजने की साजिश में गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के लिए उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने की अर्जी मंगलवार को कोर्ट दाखिल करेगी।
प्रतिबंधित शहजाद भट्टी नेटवर्क (एसबीएन) से जुड़े तीन युवकों और एक बाल अपचारी से पूछताछ के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर राना भाई के स्थानीय मददगारों, हथियारों की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। रिमांड अर्जी पर मंगलवार को सुनवाई प्रस्तावित है।
एटीएस की जांच में सामने आया है कि पंजाब निवासी गगनदीप सिंह, रजत कुमार और क्रिश अपने एक अन्य साथी के साथ 29 अक्टूबर की रात लखनऊ पहुंचे थे। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे इंटरनेट मीडिया के माध्यम से पाकिस्तानी हैंडलर राना भाई के संपर्क में थे। उसी के निर्देश पर उन्हें लखनऊ में पुलिस या सेना के किसी जवान की हत्या करने का टास्क दिया गया था। वारदात का वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजने के बदले तीन लाख रुपये देने का वादा किया गया था।
आरोपितों के अनुसार, लखनऊ पहुंचने के बाद उन्होंने रेलवे स्टेशन का वीडियो बनाकर हैंडलर को भेजा था। राना भाई ने उन्हें एक स्थानीय व्यक्ति से संपर्क कर हथियार और कारतूस लेने के निर्देश दिए थे। एटीएस अब उस व्यक्ति की पहचान करने के साथ यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार कहां से लाए गए और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं। आरोपितों के कब्जे से एक विदेशी पिस्टल और 20 कारतूस बरामद हुए थे।
प्रारंभिक जांच में आरोपितों के मोबाइल फोन में वर्चुअल नंबर से संचालित वाट्सएप अकाउंट, विदेशी नंबरों से चैट, संदिग्ध वीडियो और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रेकी से संबंधित सामग्री मिलने की बात सामने आई है। एटीएस इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर हैंडलर और आरोपितों के बीच संपर्कों की पड़ताल करेगी। वित्तीय लेनदेन की जांच कर यह भी पता लगाया जाएगा कि यात्रा और अन्य खर्चों के लिए रकम कहां से भेजी गई थी।
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पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वारदात के बाद उन्हें पुलिस से बचने के लिए नेपाल भागने का निर्देश दिया गया था। एटीएस इस साजिश में शामिल अन्य लोगों और संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। प्रकरण में एटीएस थाने में भारतीय न्याय संहिता, आयुध अधिनियम और विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज है।
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