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यूपी में होगी सहायक अध्यापकों की बंपर भर्ती, एजुकेशन क्वालिफिकेशन में बदलाव के बाद अब आयोग जल्द जारी करेगा विज्ञापन

Published: Tue, 15 Sep 2026 03:40 PM (IST)

उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 897 सहायक अध्यापकों की सीधी भर्ती का रास्ता साफ हो गया ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. 897 सहायक अध्यापकों की सीधी भर्ती का रास्ता साफ।

  2. शैक्षिक अर्हता में बदलाव, स्नातक, बीटीसी/डीएलएड और टीईटी अनिवार्य।

  3. चयन आयोग जल्द जारी करेगा संशोधित विज्ञापन।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों (अल्पसंख्यक संस्थाओं को छोड़कर) के संबद्ध प्राइमरी अनुभाग में 897 सहायक अध्यापकों की सीधी भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। शासन की ओर से इन पदों की शैक्षिक अर्हता में बदलाव किए जाने के बाद शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) प्रताप सिंह बघेल ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को पत्र भेजकर संशोधित अर्हता के आधार पर विज्ञापन जारी करने और चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है।

कुल 897 पदों में बालक संवर्ग के 473 और बालिका संवर्ग के 424 पद हैं। इन पदों की अधियाचन यानी भर्ती के लिए पदों का विवरण 20 जुलाई को चयन आयोग को भेजा गया था। इसमें संबद्ध प्राइमरी अनुभाग में सहायक अध्यापकों की नियुक्ति के लिए पहले तय शैक्षिक अर्हता में अब बदलाव किया गया है।

शिक्षा निदेशक ने आयोगी को भेजी संशोधित गजट की कॉपी

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा अधिनियम, 1921 के तहत परिषद के विनियमों में संशोधन के बाद नई शैक्षिक अर्हता को 12 सितंबर को सरकारी गजट में प्रकाशित किया गया है। शिक्षा निदेशक ने संशोधित गजट की प्रति भी चयन आयोग को भेजी है। नई व्यवस्था के अनुसार अभ्यर्थी के पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय अथवा मानित विश्वविद्यालय या संस्था से स्नातक की उपाधि होना जरूरी है।

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इसके साथ एनसीटीई से मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम से बीटीसी या डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) की उपाधि भी अनिवार्य होगी। इसके अलावा अभ्यर्थी को उत्तर प्रदेश सरकार या भारत सरकार की ओर से कक्षा एक से पांच तक के लिए आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण होना जरूरी होगा।

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पहले निर्धारित व्यवस्था में स्नातक के साथ सीटी (सर्टिफिकेट इन टीचिंग), बीटीसी (बेसिक ट्रेनिंग सर्टिफिकेट), एसटीसी (स्कूल ट्रेनिंग सर्टिफिकेट) या इसके समकक्ष अर्हता निर्धारित थी। बीटीसी प्रशिक्षित अभ्यर्थी उपलब्ध न होने की स्थिति में बीएड अर्हताधारी अभ्यर्थी की नियुक्ति का भी प्रावधान था। अब भर्ती संशोधित शैक्षिक अर्हता के आधार पर ही की जाएगी।

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