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चित्रकूट में सरयू नदी की खोज के लिए सैटेलाइट और रोवर तकनीक का सहारा लेगा विभाग, होगा वैज्ञानिक सर्वे

Published: Tue, 15 Sep 2026 02:59 PM (IST)

चित्रकूट में कंक्रीट और अतिक्रमण से अपनी पहचान खो चुकी सरयू नदी की पुरानी धारा को अब आधुनिक तकनीक से तलाशा जाएगा।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. सरयू नदी की पुरानी धारा की पहचान की जाएगी।

  2. रोवर तकनीक और सैटेलाइट सिग्नल का उपयोग होगा।

  3. नदी क्षेत्र से अतिक्रमण हटाकर पुनर्जीवन किया जाएगा।

जागरण संवाददाता, चित्रकूट। कंक्रीट और अतिक्रमण के बीच अपनी पहचान खो चुकी सरयू नदी की पुरानी धारा अब आधुनिक तकनीक से तलाशे जाने की तैयारी है। रामघाट क्षेत्र में राजस्व, नगर पालिका और संयुक्त क्षेत्र विकास प्राधिकरण की संयुक्त टीम रोवर तकनीक के जरिए नदी क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वे करेगी।

सैटेलाइट सिग्नल आधारित सर्वे से सरयू के पुराने प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र और वास्तविक सीमा का सटीक निर्धारण किया जाएगा। इसके बाद जरूरत के अनुसार नदी क्षेत्र में पिलर लगाकर सीमा को स्थायी रूप से चिह्नित किया जाएगा। प्रशासन की कवायद दैनिक जागरण के ‘मंदाकिनी कुपित..रोकी राह आई आफत’ समाचारी अभियान को बल देगी।

मंदाकिनी की सहायक यह नदी करीब पांच किलोमीटर लंबी है कामदगिरि पर्वत क्षेत्र से निकलकर राघव प्रयागघाट में मंदाकिनी नदी में मिलती है। इसी स्थान पर पयश्वनी नदी भी मिलती थी। तीन धाराओं के संगम के कारण इस क्षेत्र को चित्रकूट की त्रिवेणी कहा जाता है। पुराने समय में सरयू और पयश्वनी से जुड़े कई प्राकृतिक जलस्रोत वर्षभर सक्रिय रहते थे। इनका पानी आगे मंदाकिनी में पहुंचता था, जिससे उसकी जलधारा मजबूत बनी रहती थी।

कंक्रीट ने रोक दिए पानी के रास्ते

समय के साथ नदी क्षेत्र में हुए अतिक्रमण और बढ़ते कंक्रीट निर्माण ने प्राकृतिक जलस्रोतों और पानी के पुराने रास्तों को प्रभावित कर दिया। कई स्थानों पर जलधारा सिकुड़ गई और सरयू का प्रवाह कमजोर होता गया।

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समाजसेवी गोपाल भाई के अनुसार कभी वर्षभर बहने वाली धारा अब नाले जैसी स्थिति में पहुंच गई है। ऐसे में रोवर सर्वे से पुराने प्रवाह क्षेत्र की पहचान होने के बाद यदि अतिक्रमण हटाने और खोदाई की कार्रवाई होती है तो नदी के पुनर्जीवन की राह खुल सकती है।

गंदा पानी भी मंदाकिनी में पहुंचने की चुनौती

सरयू धारा में आसपास के होटल और घरों का गंदा पानी पहुंच रहा है। यह पानी आगे मंदाकिनी में गिरता है। नगर पालिका ने निर्मोही अखाड़ा के पास लिफ्ट सिस्टम लगाया है, जिससे गंदे पानी को सीवरेज लाइन में भेजा जाता है, लेकिन मोटर खराब होने पर व्यवस्था प्रभावित हो जाती है।

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नदी की वास्तविक सीमा तय होने के साथ जलप्रवाह और प्रदूषण नियंत्रण पर प्रभावी कार्रवाई हुई तो मंदाकिनी को भी राहत मिल सकती है।

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