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25 वोटों से शुरू हुआ सफर... कैसे लखनऊ के 'शिक्षक एमएलसी' बन गए उमेश द्विवेदी

Published: Thu, 29 Oct 2026 07:55 AM (IST)

उमेश द्विवेदी ने लखनऊ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर हैट्रिक बनाई है। उनका यह ...और पढ़ें

रमाबाई मतगणना स्थल पर कार्यकर्ताओं के साथ खुशी मनाते शिक्षक विधान परिषद सदस्य पद के विजेता उमेश द्विवेदी , साथ में उपस्थित भाजपा के स्नातक विधान परिषद सदस्य पद के प्रत्याशी अवनीश कुमार सिंह । जागरण

रमाबाई मतगणना स्थल पर कार्यकर्ताओं के साथ खुशी मनाते शिक्षक विधान परिषद सदस्य पद के विजेता उमेश द्विवेदी , साथ में उपस्थित भाजपा के स्नातक विधान परिषद सदस्य पद के प्रत्याशी अवनीश कुमार सिंह । जागरण

पुलक त्रिपाठी, लखनऊ। वर्ष 2008 में शिक्षक राजनीति में कदम रखा तो महज 25 वोट मिले, लेकिन कम समर्थन ने हौसला नहीं तोड़ा। शिक्षकों के बीच सक्रियता बनाए रखी और उनके मुद्दों को उठाने का सिलसिला जारी रखा। धीरे-धीरे यही संघर्ष पहचान बना और अब विधान परिषद के लखनऊ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीसरी जीत ने उनके राजनीतिक सफर को नई ऊंचाई दी है।

भाजपा प्रत्याशी उमेश द्विवेदी की यह यात्रा बताती है कि शिक्षक राजनीति में लंबे समय तक टिके रहने के लिए अपने मुद्दों पर निरंतरता और शिक्षकों के बीच सक्रियता कितनी महत्वपूर्ण है।

मंगलवार देर रात लखनऊ खंड शिक्षक चुनाव के नतीजों ने लखनऊ क्षेत्र के इस पद के लिए एक नई लकीर खींच दी। उमेश द्विवेदी की जीत के साथ ही उनके समर्थक भी भावुक हो गए।

लोगों का कहना है कि उनकी शिक्षक राजनीति का प्रमुख आधार वित्तविहीन शिक्षकों के अधिकारों की पैरवी रहा है। इन शिक्षकों के सामने वेतन, सेवा सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों से जुड़ी चुनौतियां लंबे समय से रही हैं। इन मुद्दों को सार्वजनिक मंचों पर उठाना और सरकार तक पहुंचाने की कोशिश करना उनकी राजनीतिक पहचान का हिस्सा बना।

वित्तविहीन शिक्षकों को प्रधानाध्यापक, प्रधानाचार्य और परीक्षक जैसी जिम्मेदारियों में समुचित मान्यता और सम्मान दिलाने की मांग भी उनके संघर्ष से जुड़ी रही है। शिक्षकों के बीच लगातार संपर्क बनाए रखने और उनकी समस्याओं को प्रमुखता से उठाने की रणनीति ने उन्हें अपनी अलग पहचान बनाने में मदद की।

निर्दलीय जीत से भाजपा तक का सफर
उमेश द्विवेदी ने वर्ष 2014 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की। यह उनकी राजनीतिक यात्रा का निर्णायक पड़ाव रहा। नवंबर 2019 में भाजपा में शामिल होने के बाद वर्ष 2020 के चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की। इस बार लगातार तीसरी जीत के साथ उन्होंने हैट्रिक पूरी कर ली है। उनकी इस यात्रा में शुरुआती कम समर्थन से लेकर लगातार जीत तक का सफर शिक्षकों के बीच अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कहानी है।

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चुनावी सफलता के साथ उनकी पहचान शिक्षक हितों के मुद्दों पर मुखर रहने वाले प्रतिनिधि के रूप में भी बनी। वित्तविहिन शिक्षकों को शिक्षक खंड में मताधिकार भी उमेश द्विवेदी की देन मानी जाती है। लगातार तीसरी जीत ने उमेश द्विवेदी को शिक्षकों के बीच अपनी भूमिका और मजबूत करने का अवसर दिया है।

वित्तविहीन शिक्षकों के साथ सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों की समस्याओं को विधान परिषद में मजबूती से उठाना, सेवा संबंधी मांगों को आगे बढ़ाना और उनके हितों के लिए सार्थक पहल करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहने की अपेक्षा शिक्षकों में है।

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