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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 28, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

यूपी में 'ग्रीन गोल्ड' बनने की राह पर गन्ना, योगी सरकार ने उत्पादन से लेकर किसानों को भुगतान में बनाये रिकॉर्ड

By Umesh TiwariEdited By:
Published: Fri, 28 Oct 2022 05:07 PM (GMT+05:30)

Sugarcane Production In UP उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक 18 अक्टूबर 2022 तक 179664.70 करोड़ रुपये ...और पढ़ें

योगी के कार्यकाल में ग्रीन गोल्ड बनने की राह पर गन्ना।
योगी के कार्यकाल में ग्रीन गोल्ड बनने की राह पर गन्ना।

UP News: लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का दावा है कि बसपा और सपा सरकार के दौरान बकाये भुगतान के कारण किसानों के लिए कड़वे हो चुके गन्‍ने की मिठास अब लौट आई है। सरकार ने गन्ना मूल्य भुगतान, गन्ने के प्रति हेक्टेयर उत्पादन, चीनी परता और कोरोना काल में सभी चीनी मिलों के संचलन के मामले में रिकॉर्ड बनाया है। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूसरे कार्यकाल में गन्ना 'ग्रीन गोल्ड' बनने की राह पर है। 

अब तक 179664.70 करोड़ से अधिक का भुगतान

उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक 18 अक्टूबर, 2022 तक 179664.70 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान हो चुका है। यह 2012 से 2017 की तुलना में 8445 करोड़ रुपये अधिक है। 2007 से 2012 की तुलना में 127534 करोड़ रुपये अधिक है। योगी सरकार द्वारा गन्ना मूल्य का रिकॉर्ड एवं समयबद्ध भुगतान की पारदर्शी प्रक्रिया, प्रति क्विंटल दाम में वृद्धि, खांडसारी इकाइयों के लाइसेंस प्रक्रिया का सरलीकरण जैसी नीतियों के कारण आने वाले समय में गन्ने की मिठास का और बढ़ना तय है। 

सरकार का पहला फोकस बकाये के भुगतान पर

प्रदेश में गन्ना किसानों की बड़ी संख्या के नाते राजनीतिक रूप से यह बेहद संवेदनशील फसल है। गन्ना मूल्य के बकाये से लेकर पेराई न होना आदि बड़ा मुद्दा बन जाता है। मार्च, 2017 में योगी सरकार के आने के पहले बकाया बड़ा मुद्दा था। सरकार ने आने के साथ ही पहला फोकस बकाये के भुगतान पर किया। भुगतान के रिकॉर्ड आंकड़े इसका प्रमाण है। भुगतान के साथ ही सरकार ने सबसे ज्‍यादा जोर पुरानी मिलों के आधुनिकीकरण और नई मिलों की स्थापना पर दिया। इस क्रम में करीब दो दर्जन मिलों की क्षमता बढ़ायी गई। गोरखपुर के पिपराइच, बस्ती के मुंडेरा और बागपत के रमाला में अत्याधुनिक और अधिक क्षमता की नई मिलें लगायी गयीं।

नयी मिलें बनीं, पुरानी मिलों का आधुनिकीकरण

बसपा और सपा शासन काल में 2007 से 2017 के दौरान बंद होने वाली 29 मिलों के मद्देनजर नई मिलों को खोलना और पुरानी मिलों का आधुनिकीकरण किसानों के हित में ऐतिहासिक कदम रहा। स्थानीय स्तर पर गन्ने की पेराई हो इसके लिए 25 साल बाद पहली बार किसी सरकार ने 100 घंटे के अंदर खांडसारी इकाइयों को ऑनलाइन लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था की। इसके दायरे में पहले से चल रही इकाइयां भी थीं। सरकार के अनुसार मौजूदा समय में 284 से अधिक इकाइयों को लाइसेंस निर्गत किया जा चुका है। इनकी कुल पेराई क्षमता 15 चीनी मिलों के बराबर है।

गुड़ के प्रसंस्करण को बढ़ावा

लोग गुड़ के गुण और स्वाद को जानें इसके लिए सरकार ने मुजफ्फरनगर एवं लखनऊ में "गुड़ महोत्सव" का आयोजन किया गया। प्रसंस्करण के जरिए गुड़ को और उपयोगी बनाया जाय इसके लिए सरकार ने गुड़ को मुजफ्फरनगर और अयोध्या का एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) घोषित कर रखा है। मीलर्स को चीनी का अधिक दाम मिले इसके लिए गोरखपुर के पिपराइच और बस्ती के मुंडेरा मिलों में सल्फर मुक्त चीनी बनाने का काम भी शुरू हुआ है। मिलें ऊर्जा के मामले में आत्म निर्भर बनें इसके लिए उनमें को-जेनरेशन प्लांट भी लगाये जा रहे हैं। सरकार ने लाखों किसानों के हित में प्रति कुंतल गन्ने का दाम 325 से 350 रुपये कर दिया।

एथनॉल के उत्पादन में नंबर वन बना यूपी

योगी सरकार के प्रयास से 2020-2021 में 107.21 करोड़ लीटर एथनॉल का उत्पादन हुआ। 2021-2022 में 160 करोड़ लीटर उत्पादन का अनुमान है। 2016-2917 में एथनॉल का उत्पादन सिर्फ 43.25 करोड़ लीटर था। इसी तरह आसवनियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। 2016-2017 में इनकी संख्या 44 थी। 2022-2022 में बढकर 78 हो गई।

जब तक खेत में गन्ना है तब तक चलेंगी मिलें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का साफ निर्देश है कि जब तक खेत में किसानों का गन्ना है तब तक उस क्षेत्र की मिल को चलना चाहिए। चीनी मिलों की बढ़ी संचलन अवधि की वजह से गन्ने की खरीद भी बढ़ी। मसलन 2014-2015 में गन्ना मिलों ने 744.83 लाख टन गन्ना खरीदा था। 2021- 2022 में यह बढ़कर 1016.33 लाख टन हो गया। इसी समयावधि में गन्ने का उत्पादन 1389.02 लाख टन से बढ़कर 2272.19 तन हो गया।

गन्ने के बारे में कुछ तथ्य

उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक गन्ना उत्पादक राज्य है। देश के गन्ने के कुल रकबे का 51 फीसद एवं उत्पादन का 50 और चीनी उत्पादन का 38 फीसद उत्तर प्रदेश में होता है। देश में कुल 520 चीनी मिलों से 119 उत्तर प्रदेश में हैं। करीब 48 लाख गन्ना किसानों में से 46 लाख से अधिक मिलों को अपने गन्ने की आपूर्ति करते हैं।

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