यूपी चुनाव 2027: मायावती के नक्शेकदम पर अखिलेश की सपा, बसपा कैडर मॉडल से होगा पीडीए विस्तार
समाजवादी पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा की तर्ज पर कैडर आधारित सामाजिक इंजीनियरिंग रणनीति अपना रही है।

HighLights
सपा 2027 चुनाव हेतु बसपा की कैडर रणनीति अपना रही है।
पीडीए फॉर्मूले को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कवायद तेज।
नेताओं को सजातीय मतदाताओं संग कैडर चौपाल का जिम्मा सौंपा।
दिलीप शर्मा, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने अपने पीडीए फार्मूले में सभी जाति-वर्गों को गोलबंदी को राजनीतिक नारों और बड़े सम्मेलनों तक सीमित रखने के बजाय जमीनी पर मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है।
पार्टी ने विधायकों, पूर्व विधायकों, पूर्व मंत्रियों और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्षों समेत ऐसे नेताओं को अलग-अलग जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में लगाया है, जिनकी अपने-अपने समाज में पकड़ मानी जाती है। इन्हें पीडीए जन चौपाल और कैडर पंचायत के जरिये अपने सजातीय लोगों से संवाद कर संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है।
पीडीए विस्तार और चुनावी गणित के साथ जोड़ रही सपा
सपा की यह रणनीति, लगभग बसपा द्वारा वर्ष 2007 में अपनाई गई सोशल इंजीनियरिंग की रणनीति की तरह ही है। बसपा लंबे समय तक जातीय सामाजिक आधार को पार्टी के कैडर और बूथ संगठन से जोड़ने के लिए इसी तरह छोटी-छोटी पंचायतों और स्थानीय स्तर के संवाद पर निर्भर रही है। सपा अब इसी तरह अपने पीडीए विस्तार और चुनावी गणित के साथ जोड़ रही है।
सपा ने पूर्व विधायक राजकुमार पाल को कौशांबी और प्रतापगढ़, पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष मनीष पाल को जौनपुर की सभी विधान सभा सीटों में अपने-अपने समाज केे बीच पीडीए जन चौपाल व कैडर पंचायत की जिम्मेदारी दी है। पूर्व मंत्री आलोक शाक्य को कासगंज, एटा व औरेया, जबकि सांसद देवेश शाक्य को मैनपुरी की जिम्मेदारी दी गई है।
अखिलेश यादव की पीडीए रणनीति का हिस्सा
आगरा के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह उर्फ राकेश बघेल पर अलीगढ़, एटा और हाथरस में चौपाल व संवाद की जिम्मेदारी है। पार्टी ने विभिन्न जातियों से जुड़े अपने प्रमुख चेहरों को इसी जिम्मेदारियां दी हैं और सभी विधान सभा सीटों पर ताकत बढ़ाने को काम हो रहा है।
सपा ने पहले भी पहले भी पार्टी ने गैर-यादव पिछड़ी जातियों, दलितों और ब्राह्मणों के बीच सामाजिक सम्मेलन व यात्राएं कराई थीं, परंतु इस बार विधान सभा क्षेत्र के अंदर छोटी-छोटी बैठकों से पार्टी कैडर खड़ा करने की कोशिश में है। यह कवायद सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पीडीए रणनीति का हिस्सा है।
पार्टी यादव-मुस्लिम आधार से आगे बढ़कर कुर्मी, मौर्य, शाक्य, सैनी, निषाद, पाल, प्रजापति जैसे पिछड़े समूहों के साथ विभिन्न दलित वर्गों तक पहुंच बढ़ाना चाहती है। साथ ही ब्राह्मण व अन्य सवर्ण समूहों को भी जोड़ने की कोशिश है।
हालांकि, सपा की चुनौती इन पंचायतों को भीड़ जुटाने तक सीमित न रखकर स्थायी जातीय कैडर और बूथ नेटवर्क में बदलने की है। यही तय करेगा कि यह रणनीति 2027 में कितनी सीटों पर वोट में बदलती है।
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