शिवा शर्मा हत्याकांड: सर्विलांस से बचने के लिए श्रद्धा ने देखा यूट्यूब Video, सिम निकालकर 11 दिन तक दिया पुलिस को चकमा
कैफे संचालक शिवा शर्मा हत्याकांड में आरोपी श्रद्धा दुबे ने पुलिस सर्विलांस से बचने के लिए यूट्यूब वीडियो का सहारा ...और पढ़ें

HighLights
श्रद्धा ने यूट्यूब वीडियो से सीखा पुलिस सर्विलांस से बचना।
सिमकार्ड निकालकर और हॉटस्पॉट से देखी सर्विलांस से बचने की वीडियो।
आठ लाख रुपये लेकर 11 दिन तक पुलिस से बची श्रद्धा।
आयुष्मान पांडेय, लखनऊ। कैफे संचालक शिवा शर्मा हत्याकांड में फरारी के दौरान श्रद्धा दुबे ने पुलिस की सर्विलांस से बचने के लिए यूट्यूब का सहारा लिया था। मुंबई में बैठे उसके एक साथी ने उसे यूट्यूब वीडियो का लिंक भेजकर सर्विलांस से बचने का तरीका बताया था।
इसके बाद श्रद्धा, उसकी बहन रश्मि दुबे और चालक दानिश उर्फ तनवीर ने अपने मोबाइल फोन से सिमकार्ड निकाल दिए थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, श्रद्धा ने टैक्सी चालक का हाटस्पाट लेकर भेजे गए लिंक से वीडियो देखा और उसके बताए तरीके को फरारी के दौरान अपनाया। इसी तरह वह 11 दिन तक पुलिस से बचती रही।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, शिवा की हत्या के बाद श्रद्धा अपनी बहन रश्मि और चालक दानिश के साथ दुबग्गा निवासी आमिर की ओर से उपलब्ध कराई गई टैक्सी से फरार हुई थी। रास्ते में उसने सबसे पहले एक वकील से संपर्क किया। वकील ने उसे फरार रहने की सलाह देते हुए अग्रिम जमानत कराने का भरोसा दिया था। बताया था कि इसके लिए केवल शपथपत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए आना होगा।
आमिर के कहने पर नेपाल चली गई थी श्रद्धा
इसके बाद श्रद्धा, आमिर के कहने पर नेपाल चली गई। जांच में सामने आया कि आमिर ने श्रद्धा को नेपाल का एक सिमकार्ड भेजा था और उसे नेपाल पहुंचकर चालू करने के लिए कहा था। नेपाल पहुंचने के बाद श्रद्धा ने मुंबई में बैठे अपने एक साथी से संपर्क किया। साथी ने उसे बताया कि पुलिस सर्विलांस के जरिये उसकी लोकेशन तक पहुंच सकती है।
इसके बाद उसने मोबाइल से सिमकार्ड निकालने और दूसरे के हाटस्पाट से यूट्यूब लिंक खोलकर वीडियो देखने की सलाह दी। श्रद्धा ने टैक्सी चालक के हाटस्पाट से वीडियो देखा और फरारी के दौरान इसी तरीके का इस्तेमाल किया।
आठ लाख रुपये लेकर निकली, जरूरत से ज्यादा किया भुगतान: फरारी के दौरान श्रद्धा अपने साथ करीब आठ लाख रुपये लेकर निकली थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उसने सफर में कैश से भुगतान किया। टैक्सी चालकों से लेकर होटल कर्मचारियों तक को वह जरूरत से ज्यादा रुपये दे रही थी, ताकि कोई उसके बारे में पुलिस को सूचना न दे। जांच एजेंसियां अब उसके खर्च, ठहरने के ठिकानों और यात्रा में मदद करने वालों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं
यह भी पढ़ें- गिरफ्तारी के बाद भी नहीं ढीले पड़े श्रद्धा दुबे के तेवर, हजरतगंज कोतवाली में दिखा रैंप वॉक जैसा अंदाज
कुछ संदिग्धों से पूछताछ चल रही है। जिन लोगों ने फर्जी आइडी पर कमरा दिया या बिना आइडी के दिया। उन सभी लोगों को नोटिस भेजा जाएगा। साथ ही जो भी जांच में आएगा। उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। - अर्पित विजयवर्गीय, डीसीपी मध्य।
