कनिष्ठ विश्लेषक भर्ती का परिणाम अटका, अभ्यर्थियों ने यूपीएसएसएससी के सामने किया प्रदर्शन
Protest Outside UPSSSC: अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती में देरी से उनका भविष्य अधर में है, वहीं खाद्य सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) के सामने प्रदर्शन
HighLights
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती में देरी से उनका भविष्य अधर में, खाद्य सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित
प्रदेश में 15 नई खाद्य प्रयोगशालाएं बनकर तैयार, तकनीकी स्टाफ की कमी
जागरण संवाददाता, लखनऊ : उत्तर प्रदेश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच करने वाले कनिष्ठ विश्लेषकों की कमी दूर करने के लिए शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया का अंतिम परिणाम अब तक घोषित नहीं हुआ है। इससे नाराज अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) के सामने प्रदर्शन कर जल्द परिणाम जारी करने की मांग की। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती में देरी से उनका भविष्य अधर में है, वहीं खाद्य सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
अभ्यर्थियों के अनुसार, प्रदेश में करीब 60 कनिष्ठ विश्लेषकों के भरोसे खाद्य नमूनों की जांच का काम चल रहा है, जबकि हर साल लगभग 40 हजार नमूने एकत्र किए जाते हैं। ऐसे में जांच व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। उनका कहना है कि प्रदेश में 15 नई खाद्य प्रयोगशालाएं बनकर तैयार हैं, लेकिन तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण इनका पूरी क्षमता से संचालन नहीं हो पा रहा है।
अभ्यर्थियों के अनुसार खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) में कनिष्ठ विश्लेषक (खाद्य) के पदों पर भर्ती के लिए वर्ष 2023 में अधियाचन भेजा गया था। आयोग ने विज्ञापन संख्या के तहत भर्ती प्रक्रिया शुरू की। इसकी लिखित परीक्षा 16 फरवरी 2025 को हुई थी, जबकि अक्टूबर-नवंबर 2025 में अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। इसके बाद भी अंतिम परिणाम घोषित नहीं होने से अभ्यर्थियों में नाराजगी है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि खाद्य विश्लेषकों की कमी और जांच रिपोर्ट मिलने में देरी से मिलावट के मामलों में समय पर कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। नई प्रयोगशालाओं के संचालन और रिक्त पदों पर नियुक्तियां होने से जांच क्षमता बढ़ सकती है। उन्होंने सरकार और आयोग से भर्ती प्रक्रिया पूरी कर जल्द अंतिम परिणाम जारी करने की मांग की, ताकि योग्य अभ्यर्थियों को रोजगार मिलने के साथ प्रदेश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत हो सके।
