जिस बीमारी से सैकड़ों को बचाया उसी ने ली डॉक्टर की जान, पद्मश्री न्यूरोसर्जन डॉ. अशोक कुमार की ब्रेन ट्यूमर से मौत
प्रख्यात न्यूरोसर्जन और पद्मश्री डॉ. अशोक कुमार महापात्र का 74 वर्ष की आयु में ब्रेन ट्यूमर से निधन हो गया।

HighLights
पद्मश्री डॉ. अशोक महापात्र का ब्रेन ट्यूमर से निधन।
सैकड़ों लोगों को मस्तिष्क रोगों से बचाया था उन्होंने।
एसजीपीजीआई के पूर्व निदेशक, एम्स भुवनेश्वर के संस्थापक।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। मस्तिष्क विशेषज्ञ रहे और ब्रेन की सर्जरी कर सैकड़ों लोगों की जिंदगी बचाई। कितने लोगों के दिमाग के ट्यूमर को निकालकर नया जीवन दिया, लेकिन खुद ब्रेन ट्यूमर से हार गए। एसजीपीजीआई के पूर्व निदेशक एवं प्रख्यात न्यूरोसर्जन पद्मश्री डॉ. अशोक कुमार महापात्र ने सोमवार रात 9:15 बजे एम्स नई दिल्ली में आखिर सांस ली। वह 74 वर्ष के थे।
डॉ. महापात्र लंबे समय ब्रेन कैंसर के सबसे खतरनाक रूप ग्लोबलास्टोमा से पीड़ित थे। हालत बिगड़ने पर पिछले माह दो अक्टूबर को उन्हें भुवनेश्वर से एयरलिफ्ट कर दिल्ली एम्स लाया गया था, जहां ब्रेन स्ट्रोक के बाद इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
एसजीपीजीआई से गहरा नाता
प्रो. महापात्र का एसजीपीजीआई से गहरा नाता रहा है। वह 2006 से 2009 तक संस्थान के निदेशक रहे। उनके कार्यकाल में न्यूरो सर्जरी विभाग को नई पहचान मिली। यही नहीं, एम्स भुवनेश्वर के संस्थापक निदेशक भी थे।
डॉ. महापात्र ने ओडिशा के कंधमाल के जुड़े हुए सिर वाले जुड़वां बच्चों जगा-कालिया को 16 घंटे की ऐतिहासिक सर्जरी कर सफलतापूर्वक अलग कर देशभर में सुर्खियां बटोरी थी। इस योगदान के लिए उन्हें 2024 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
इतिहास ने खुद को दोहराया
एसजीपीजीआई के लिए यह पहली विडंबना नहीं है। इससे पहले संस्थान में न्यूरो सर्जरी विभाग की स्थापना करने वाले और पहले विभागाध्यक्ष रहे प्रो. देवेंद्र कुमार छाबड़ा का निधन भी इसी तरह हुआ था। उन्होंने 1986 में विभाग की नींव रखी और सस्ती ‘छाबड़ा शंट’ बनाकर लाखों मरीजों को जीवन दिया।
30 जून 2020 को लखनऊ में लंबी बीमारी के बाद उनका भी निधन हो गया था, उन्हें भी अंतिम समय में मस्तिष्क संबंधी गंभीर समस्या थी। एक ने पीजीआई में न्यूरो सर्जरी को जन्म दिया, दूसरे ने उसे ऊंचाई दी और दोनों ही मस्तिष्क की बीमारी से हार गए।
निश्चित तौर पर यह हम सभी के लिए बड़ी क्षति है। डॉ. अशोक महापात्र देश के चुनिंद न्यूरो सर्जन थे। उन्होंने संस्थान के न्यूरोसर्जरी विभाग में कई सुविधाएं शुरू कराईं। बतौर निदेशक भी उनकी शानदार पारी रही।
-प्रो. आरके धीमान, निदेशक, एसजीपीजीआई
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