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भर्ती घोटाले में सेवानिवृत आईएएस अफसर योगेश कुमार गिरफ्तार, पूर्व मंत्री राजकिशोर की फाइल पर कोई हलचल नहीं

Published: Sat, 17 Oct 2026 07:09 PM (IST)

Recruitment Scam in UP: एक ही भर्ती प्रक्रिया में तत्कालीन प्रमुख सचिव आईएएस की गिरफ्तारी के बाद भी पूर्व मंत्री ...और पढ़ें

सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश कुमार ---  तत्कालीन मंत्री राजकिशोर सिंह

सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश कुमार --- तत्कालीन मंत्री राजकिशोर सिंह

HighLights

  1. योगेश कुमार को पुलिस ने चार दिन पहले किया था गिरफ्तार

  2. पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह की फाइल पर गृह विभाग में कोई हलचल नहीं

  3. पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में पूर्व मंत्री के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति का इंतजार

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : अखिलेश यादव की सरकार में पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में शासन दोहरी चाल चल रहा है। इस घोटाले में तत्कालीन प्रमुख सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी योगेश कुमार की गिरफ्तारी के चार दिन बाद भी तत्कालीन मंत्री राजकिशोर सिंह के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) ने 14 अक्टूबर को योगेश कुमार को गिरफ्तार किया था। तत्कालीन पशुधन मंत्री राजकिशोर सिंह के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति की फाइल चार दिन बाद भी शासन में लंबित बताई जा रही है। एक ही भर्ती प्रक्रिया में तत्कालीन प्रमुख सचिव की गिरफ्तारी के बाद भी पूर्व मंत्री की फाइल पर निर्णय नहीं होने से शासन की कार्रवाई चर्चा में है।

वर्ष 2014 में तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के 17 मंडलों में पशुधन प्रसार अधिकारियों के 1198 पदों पर भर्ती हुई थी। भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद जांच शुरू हुई। जांच एजेंसियों ने चयन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और ओएमआर शीट के मूल्यांकन सहित कई बिंदुओं की पड़ताल की। इस मामले में कई आरोपितों के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। जांच के दौरान तत्कालीन प्रमुख सचिव योगेश कुमार और तत्कालीन मंत्री राजकिशोर सिंह ने खुद हस्ताक्षर करके पूरे नियम बदल दिए थे।

पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति की फाइल शासन स्तर पर लंबित है। ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) की ओर से इस संबंध में अनुस्मारक भेजे जाने की बात भी कही गई है। हालांकि, गृह विभाग में फाइल की मौजूदा स्थिति, उस पर अंतिम बार कब विचार हुआ और निर्णय में देरी का कारण क्या है, इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

योगेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद अब निगाहें राजकिशोर सिंह के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति पर टिकी हैं। जांच एजेंसी की कार्रवाई और शासन स्तर पर अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया अलग-अलग चरण हैं।

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