यूपी में पीएमएचएस डॉक्टर अब कर सकेंगे सुपर स्पेशियलिटी की पढ़ाई, 10 साल सरकारी सेवा जरूरी
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा (पीएमएचएस) संवर्ग के डॉक्टरों को अब सुपर स्पेशियलिटी सहित उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रमों की पढ़ाई की सशर्त अनुमति दे दी है।

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
पीएमएचएस डॉक्टर अब सुपर स्पेशियलिटी कोर्स कर सकेंगे।
पढ़ाई के बाद 10 साल सरकारी सेवा या 1 करोड़ का बांड।
अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष निर्धारित, प्रोबेशन पूरा होना अनिवार्य।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। सरकार ने प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा (पीएमएचएस) संवर्ग के डाक्टरों को सुपर स्पेशियलिटी समेत उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रमों की पढ़ाई का सशर्त रास्ता खोल दिया है।
विशेषज्ञ पढ़ाई पूरी करने के बाद डाक्टरों को दस वर्ष तक सरकारी अस्पतालों में अनिवार्य रूप से सेवा देनी होगी। इस शर्त का उल्लंघन करने पर कार्रवाई के लिए एक करोड़ रुपए बांड भराया जाएगा। अभी तक सरकारी डाक्टरों को सिर्फ पीजी ( परास्नातक) की अनुमति मिलती थी।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि पीजी डिग्री, डिप्लोमा धारक पीएमएचएस डाक्टर नीट, समकक्ष प्रवेश परीक्षा के जरिए विशेषज्ञ (सुपर स्पेशियलिटी) पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकेंगे। इसके लिए विभाग से अनुमति तभी मिलेगी, जब संबंधित डॉक्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, सतर्कता जांच या आपराधिक मामला लंबित न हो। उनकी प्रोबेशन अवधि पूरी हो गयी हो।
उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष निर्धारित की गई है। इसके लिए शासनादेश जारी कर दिया गया है।
शासनादेश में कहा गया है कि जो डाक्टर पहले ही पीजी डिप्लोमा कर चुके हैं, उसी विशेषज्ञता में डिग्री या दूसरे विषय में अन्य डिप्लोमा भी कर सकेंगे। वहीं, पीजी डिग्री धारक डाक्टर दूसरे विषय में भी पीजी डिग्री की पढ़ाई कर सकेंगे।
विशेषज्ञता में प्रवेश से पहले संबंधित डाक्टरों को एमबीबीएस और पीजी डिग्री महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं के कार्यालय में जमा करनी होगी। बीच में पढ़ाई छोड़ने पर अगले पांच वर्ष तक किसी अन्य उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रम में प्रवेश नहीं मिलेगा। तीन से अधिक बार परीक्षा में असफल होने पर परीक्षा देने के लिए शासन की अनुमति लेनी होगी।
ठ्यक्रम पूरा होते ही डाक्टरों को पुरानी तैनाती पर लौटकर कार्यभार संभालना होगा। पहली बार उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रम करने वाले डाक्टरों को दो वर्ष का अध्ययन अवकाश और एक वर्ष का बिना वेतन असाधारण अवकाश मिलेगा। पहले विभागीय अनुमति लेकर पीजी की पढ़ाई कर चुके डॉक्टरों को दोबारा पढ़ाई के लिए बिना वेतन असाधारण अवकाश मिलेगा।
अवकाश स्वीकृत होने के बाद ही उनकी सेवा नियमित और निरंतर मानी जाएगी। पहले पीजी की पढ़ाई कर चुके डाक्टरों को दोबारा उच्चतर चिकित्सा पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए पूर्व निर्धारित दस वर्ष की अनिवार्य सेवा में से पांच वर्ष पूरे करने होंगे।
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