लखनऊ (जेएनएन)। सहारनपुर के बडग़ांव क्षेत्र में हालात सामान्य हो रहे हैं। दलित और ठाकुरों ने समझौता कर कई मुकदमों में शपथ पत्र भी दे दिए हैं लेकिन हिंसा की ठंडी होती आग में सियासत घी डालने से बाज नहीं आ रही। आज भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष इमरान मसूद ने जिस तरीके से आक्रामक बयानबाजी की। जिस तरह वह जातीय हिंसा के मसले में मुसलमानों को जबरदस्ती लपेटते नजर आए। उससे साफ हो गया है कि सियासत अमन के रास्ते में फिर दीवार खड़ी कर सकती है। 

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दलित-मुस्लिम गठजोड़ की बातें

आज इमरान ने मीडिया से कहा कि ये लड़ाई अब भीम आर्मी की नहीं, बल्कि दलितों के साथ मुसलमानों की भी है। प्रशासन को धमकी भी दी कि रावण के साथ पुलिस ने मारपीट या अभद्र व्यवहार किया तो अंजाम बुरा होगा। बड़ी मुश्किल से दलितों को रोका हुआ है। इसके बाद जनपद में जो भी कुछ होगा, उसके जिम्मेदार डीएम-एसएसपी स्वयं होंगे। भीम आर्मी को सामाजिक संगठन करार देते हुए उन्होंने चंद्रशेखर को दलित नहीं, बल्कि सभी का नेता बताया। कहा कि चंद्रशेखर पर 12 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया गया। फिर भाजपा सांसद राघव लखन पाल शर्मा पर इनाम घोषित न होना शासन-प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े करता है। भाजपा सांसद को बचाने के लिए स्क्रिप्ट तैयार की गई है। भाजपा की दमनकारी नीतियों से जनता त्रस्त हो चुकी है। पत्रकार वार्ता में रावण की मां व भाई की मौजूदगी भी सियासी खिचड़ी की तरफ इशारा कर रही है। 

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इमरान मसूद का दिमागी संतुलन बिगड़ा

भाजपा सांसद  राघव लखनपाल शर्मा ने कहा कि इमरान मसूद का दिमागी संतुलन बिगड़ गया है। 26 जुलाई 2014 को सहारनपुर में हुए दंगे के जनक तो इमरान मसूद हैं हीं। सड़क दूधली की घटना के दिन इमरान व सहारनपुर देहात के विधायक की मौजूदगी आसपास रही। इन दोनों के इशारे पर ही निर्दोष भाजपाइयओं पर जान से मारने की नीयत से पथराव हुआ। शब्बीरपुर ङ्क्षहसा हो या अन्य ङ्क्षहसा, उसके भी दोषी इमरान मसूद है।