पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेटवर्क पर NIA का बड़ा एक्शन, खंगाली जा रही टेरर फंडिंग; लखनऊ में FIR
एनआईए ने पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेटवर्क द्वारा भारतीय युवाओं को आतंकी गतिविधियों से जोड़ने की साजिश की जांच तेज कर दी है।

पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी। (तस्वीर- फाइल)
HighLights
एनआईए ने शहजाद भट्टी नेटवर्क की जांच तेज की।
विदेशी हैंडलरों, फंडिंग और सोशल मीडिया की पड़ताल।
तीन गिरफ्तार युवकों की पुलिस रिमांड मांगी जाएगी।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेटवर्क के जरिये भारतीय युवाओं को आतंकी गतिविधियों से जोड़ने की साजिश की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने तेज कर दी। एजेंसी की लखनऊ इकाई ने इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज करा दिया है।
जांच में विदेशी हैंडलरों से संपर्क, नेटवर्क को मिलने वाली आर्थिक मदद, सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं की भर्ती और देश में सक्रिय स्थानीय संपर्कों की भूमिका खंगाली जाएगी।
इस बीच, लखनऊ में शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार तीन युवकों से पूछताछ के लिए मंगलवार यानी आ एटीएस/एनआइए कोर्ट, लखनऊ में पुलिस कस्टडी रिमांड की अर्जी दाखिल की जाएगी। इसके बाद आरोपितों की रिमांड पर सुनवाई होगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खंगाल रही एनआइए
एनआइए ने इस एफआइआर में विदेशी गैंगस्टरों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के माध्यम से भारतीय युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने से संबंधित आरोपों की जांच का उल्लेख है। एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर भारतीय युवाओं तक कैसे पहुंच रहे थे, उन्हें किस तरह के निर्देश दिए जा रहे थे और कथित आतंकी गतिविधियों के लिए संसाधन कहां से जुटाए जा रहे थे।
इससे पहले उत्तर प्रदेश एटीएस ने इसी वर्ष 23 अप्रैल को नोएडा से बागपत निवासी तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्लाह अली खान और दिल्ली निवासी समीर खान को गिरफ्तार किया था। जांच में दोनों के पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी आबिद जट के संपर्क में होने की बात सामने आई थी।
30 अक्टूबर को तीन लोग हुए थे गिरफ्तार
आरोप है कि विदेशी हैंडलरों के निर्देश पर दोनों उत्तर प्रदेश और दिल्ली में ग्रेनेड हमलों तथा हत्याओं की साजिश रच रहे थे। एटीएस इस मामले में आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। अब एनआइए विदेशी संपर्कों और डिजिटल साक्ष्यों की व्यापक जांच के जरिये नेटवर्क की अन्य कड़ियां जोड़ने का प्रयास करेगी।
इसी नेटवर्क से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में एटीएस ने 30 अक्टूबर को लखनऊ में पंजाब निवासी गगनदीप सिंह, रजत कुमार और कृष्ण को गिरफ्तार किया था, जबकि एक नाबालिग को निगरानी में लिया गया था।
आरोप है कि ये लोग पाकिस्तान में बैठे हैंडलर राना भाई के निर्देश पर लखनऊ में पुलिस या सेना के किसी जवान की हत्या अथवा किसी सुरक्षा प्रतिष्ठान पर हमला करने की साजिश रच रहे थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपितों को कथित वारदात का वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजने के निर्देश दिए गए थे। इसके बदले तीन लाख रुपये देने का लालच दिए जाने का भी आरोप है। एटीएस ने आरोपितों के पास से विदेशी पिस्टल और 20 कारतूस बरामद करने की बात कही थी।
रिमांड में खुल सकती हैं नेटवर्क की अहम कड़ियां
जांच एजेंसियों की पड़ताल में मोबाइल फोन, इंटरनेट मीडिया अकाउंट, वाट्सएप चैट, विदेशी नंबरों से संपर्क और संदिग्ध डिजिटल सामग्री की जांच अहम होगी। इसके साथ ही कथित नेटवर्क को मिलने वाली रकम, हथियारों की आपूर्ति करने वाले संपर्कों और स्थानीय स्तर पर मदद करने वालों की भूमिका का पता लगाया जाएगा।
एजेंसियां यह भी जानने का प्रयास करेंगी कि विदेशी हैंडलर अलग-अलग राज्यों के युवाओं को किस तरीके से अपने संपर्क में लेते थे और उन्हें आपराधिक अथवा आतंकी गतिविधियों के लिए कैसे तैयार किया जाता था।
मंगलवार यानी आज को तीन आरोपितों की पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए दाखिल होने वाली अर्जी पर लखनऊ अदालत के निर्णय के बाद पूछताछ की अवधि और दायरा तय होगा।
रिमांड मिलने की स्थिति में जांच एजेंसियों को आरोपितों से सीधे पूछताछ कर उनके संपर्कों, कथित साजिश और नेटवर्क के संचालन से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करने का अवसर मिलेगा।
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