भारत-श्रीलंका आए साथ: लखनऊ में यूपी के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर करेंगे बड़ी रिसर्च, NBRI ने दिया बड़ा अपडेट
भारत और श्रीलंका के बीच वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय संबंधों को नई दिशा मिलेगी, जिसमें लखनऊ का एनबीआरआई महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
भारत-श्रीलंका वैज्ञानिक सहयोग को मिलेगी नई दिशा।
एनबीआरआई लखनऊ और एनआईएफएस कैंडी करेंगे साझेदारी।
वनस्पति, जैव विविधता, औषधीय पौधों पर होगा शोध।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। भारत और श्रीलंका के बीच वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय संबंधों को एक नई दिशा मिल सकती है। श्रीलंका लखनऊ के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआइ) के साथ मिलकर विभिन्न अनुसंधान और विकास परियोजनाओं पर कार्य कर सकता है।
इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य वनस्पति विज्ञान, जैव विविधता संरक्षण, कृषि अनुसंधान और औषधीय पौधों के संवर्धन में तकनीकी सहयोग बढ़ाना है। इसको लेकर श्रीलंका के कैंडी स्थित राष्ट्रीय मौलिक अध्ययन संस्थान (एनआइएफएस) के निदेशक प्रो. डगलस सिरिल अभयविक्रम विजेसुंदरा ने एनबीआरआइ में संवाद किया। कहा कि एक साथ मिलकर काम करने से नए औषधीय पौधों की खोज, शोध व जैव विविधता संरक्षण को नई दिशा मिल सकती है।
एनबीआरआइ के ग्लैडियोलस कान्फ्रेंस रूम में आयोजित इस संवाद में प्रो. विजेसुंदरा ने संस्थागत सहयोग को सुदृढ़ करने के विभिन्न अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया। भविष्य में वैज्ञानिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। कहा कि संवाद वनस्पति एवं पादप विज्ञान के क्षेत्रों में, अधिक निकट सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा।
दोनों संस्थानों के बीच सहयोगात्मक अनुसंधान, वैज्ञानिक विशेषज्ञता एवं ज्ञान का आदान-प्रदान, अनुसंधान सुविधाओं का साझा उपयोग, क्षमता निर्माण, पादप विविधता एवं संरक्षण, पादप प्रवर्धन, पादप जैवप्रौद्योगिकी और अन्य संबंधित क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं हैं।
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वहीं, सीएसआइआर–एनबीआरआइ लखनऊ एवं सीएसआइआर–आइआइआइएम जम्मू के निदेशक डा. जबीर अहमद ने कहा कि विभिन्न देशों के संस्थानों के बीच वैज्ञानिक साझेदारियां शोधकर्ताओं को एक-दूसरे से सीखने और चुनौतियों के समाधान के लिए विविध विशेषताओं को एक साथ लाना जरूरी है।
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इस अवसर पर एनबीआरआइ के विज्ञानी डा. समीर सावंत ने संस्थान के वनस्पति संग्रह, विविध पादप प्रजातियों, उद्यानों, ऊतक संवर्धन सुविधाओं के बारे में जानकारी दी।
