लखनऊ में होगा राष्ट्रीय जनजातीय भागीदारी उत्सव, 16 राज्यों के कलाकार होंगे शामिल
लखनऊ में 23 से 26 नवंबर तक राष्ट्रीय जनजातीय भागीदारी उत्सव का आयोजन होगा, जिसमें 16 राज्यों की जनजातीय कला और संस्कृति का प्रदर्शन किया जाएगा।

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह
HighLights
लखनऊ में 23-26 नवंबर को राष्ट्रीय जनजातीय भागीदारी उत्सव।
16 राज्यों के 500 से अधिक कलाकार देंगे सांस्कृतिक प्रस्तुतियां।
बिरसा मुंडा जयंती पर जनजातीय कला, शिल्प का प्रदर्शन।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश सरकार देश की जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं व शिल्प को प्रदर्शित करने के लिए राजधानी लखनऊ में 23 से 26 नवंबर तक राष्ट्रीय जनजातीय भागीदारी उत्सव का आयोजन कराने जा रही है।
लोकनायक बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष में यूपी दर्शन पार्क गोमती नगर में आयोजित होने वाली इस उत्सव में 16 राज्यों की जनजातीय कला, संस्कृति, लोक परंपराओं और पारंपरिक हुनर को मंच दिया जाएगा। 500 से अधिक जनजातीय कलाकार प्रस्तुतियां देंगे, वहीं शिल्प और खानपान के 150 स्टाल भी लगाए जाएंगे।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह आयोजन उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, समाज कल्याण विभाग, जनजाति विकास विभाग और पर्यटन निदेशालय द्वारा मिलकर कराया जा रहा है इसमें मेजबान उत्तर प्रदेश के साथ मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, त्रिपुरा, असम, छत्तीसगढ़ और हरियाणा के कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
उत्सव में जनजातीय कलाकारों के साथ घुमंतू समुदायों की पारंपरिक कलाओं को भी विशेष स्थान दिया जाएगा। इसमें बीन वादन, जादू, कठपुतली, बहुरूपिया और नट-नटी की प्रस्तुतियां होंगी। लोकनायक भगवान बिरसा मुंडा के जीवन और योगदान पर आधारित रंगोली के साथ नाटक भी आयोजित किए जाएंगे। विलुप्त होती लोक विधाओं को इस आयोजन का मुख्य आकर्षण बनाया जाएगा।
विदेशी कलाकार भी होंगे शामिल
150 से अधिक शिल्पकार अपनी कला और उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे। मेले में जनजातीय व्यंजनों, हस्तशिल्प, पारंपरिक आभूषणों और जनजातीय वाद्ययंत्रों की दुकानें लगाई जाएंगी। इसके साथ जनजातीय चित्रकला और हस्तशिल्प की प्रदर्शनी तथा कार्यशालाएं भी आयोजित होंगी। मूंज और गेहूं के डंठल से उपयोगी और सजावटी सामग्री बनाने का प्रदर्शन किया जाएगा।
जनजातीय जीवन और परंपराओं को करीब से समझाने के लिए आयोजन स्थल पर ग्रामीण परिवेश भी तैयार किया जाएगा। इसके अलावा जनजातीय संस्कृति और परंपराओं पर आधारित पुस्तकों की बिक्री की व्यवस्था भी होगी।
इस बार जनजातीय भागीदारी उत्सव में मध्य प्रदेश को थीम स्टेट के रूप में शामिल किया गया है। इसके तहत वहां की जनजातीय कला, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजन में विदेशी कलाकार भी प्रतिभाग करेंगे।
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