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शारदीय नवरात्र: कलश स्थापना के साथ शुरू होगा मां दुर्गा का गुणगान, मंदिरों में महाआरती की तैयारियां पूरी

Published: Sat, 10 Oct 2026 11:52 PM (GMT+05:30)

लखनऊ में शारदीय नवरात्र रविवार से शुरू हो रहे हैं, जिसके लिए मंदिरों और बाजारों में तैयारियां पूरी हैं। कलश ...और पढ़ें

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HighLights

  1. शारदीय नवरात्र रविवार से शुरू, लखनऊ में तैयारियां पूरी।

  2. कलश स्थापना सुबह 6:03 से 9:56 बजे तक शुभ।

  3. मां भवानी का आगमन हाथी पर, नवरात्र 10 दिन के।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। मां के प्रति आस्था और समर्पण का शारदीय नवरात्र रविवार से है। मां के आगमन और उनकी पूजा अर्चना के लिए मंदिरों में जहां तैयारियां पूरी हो गईं हैं तो बाजार में मां की चुनरी से लेकर प्रसाद की खरीदारी के चलते एक दिन पहले ही बाजार चमक उठे हैं।

अमीनाबाद से लेकर निशातगंज और आलमबाग से लेकर गोमतीनगर, हर ओर पूजन सामग्री की दुकानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ है। मां दुर्गा के स्वागत के लिए मंदिरों से लेकर घरों तक विशेष सजावट की जा रही है।

राजधानी के सबसे बड़े शक्तिपीठ चौक की बड़ी काली जी मंदिर में नवरात्र के दौरान प्रतिदिन ज्योति की पूजा-अर्चना और श्री दुर्गासप्तशती का पाठ होगा। शास्त्री नगर स्थित श्री दुर्गा मंदिर में मां के प्रतिदिन के स्वरूप के अनुरूप विशेष शृंगार किया जाएगा।

छोटी काली जी मंदिर, संदोहन देवी मंदिर, संकटा देवी मंदिर के अलावा शास्त्री नगर के श्री दुर्गा मंदिर, मां संतोषी देवी मंदिर, छितवापुर व गणेशगंज के भुइयन देवी मंदिर समेत सभी मंदिरों में पूजन व दर्शन की तैयारियां पूरी हैं।

ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि रविवार को सुबह 6:03 बजे से सुबह 9:56 बजे तक होगी कलश स्थापना करना श्रेयस्कर हाेगा। हालांकि अभिजित मुहूर्त सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक है, इस मुहूर्त में भी घट स्थापना की जा सकती है।

हाथी पर सवार होकर आएंगी मां भवानी

ज्योतिषाचार्य शक्तिधर त्रिपाठी ने बताया कि नवरात्र में कलश स्थापना, अखंड ज्योति और दुर्गासप्तशती पाठ का विशेष महत्व है। श्रद्धालुओं को मां के प्रति समर्पण और श्रद्धा के साथ पूजा करनी चाहिए। इस बार मां भवानी का आगमन हाथी पर हो रहा है।

हाथी को शक्ति, स्थिरता, धैर्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। काशी पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि की वृद्धि होने से नवरात्र इस बार नौ के बजाय 10 दिन का होगा। ज्योतिषाचार्य राकेश पांडेय ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की आराधना होगी।

18 को अष्टमी पर होगा कन्या पूजन

ज्योतिषाचार्य आनंद दुबे के अनुसार नवरात्र की अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है। अष्टमी 18 अक्टूबर को पूरे दिन रहेगी और 19 अक्टूबर को सुबह 6:53 बजे तक रहेगी।

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इसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी, जो 20 अक्टूबर को सुबह 9:34 बजे तक रहेगी। 20 अक्टूबर को नवरात्र व्रत का पारण, दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन और दशहरा मनाया जाएगा।