लखनऊ में चौपट चौराहे- इंदिरा नगर में मुंशी पुलिया चौराहे पर अराजकता का चरम, निकल रहा ट्रैफिक का दम
Lucknow Mein Chaupat Chaurahe: मुंशी पुलिया चौराहा पर वाहनों के हार्न का शोर इतना अधिक है कि चंद सेकंड में ...और पढ़ें

मुंशी पुलिया चौराहे पर बने पिंक बूथ के पीछे किया गया अतिक्रमण। जागरण
HighLights
ई रिक्शा, आटो और खराब इंजीनियरिंग ने बढ़ायी मुंशी पुलिया चौराहे की मुसीबत
आटो की अनियंत्रित संख्या के कारण लगने वाले जाम से लोग जूझ रहे प्रतिदिन हजारों
आशुतोष पांडेय, लखनऊ : Lucknow Mein Chaupat Chaurahe- मेट्रो जैसी स्मार्ट सेवा और ओवरब्रिज के जाल के बीच इंदिरा नगर के मुंशी पुलिया चौराहा का यातायात कराह रहा है। यहां खराब इंजीनियरिंग, ट्रैफिक संभालने के कम संसाधन, फुटपाथ पर कब्जे, ई रिक्शा के साथ बेतरतीब और आटो की अनियंत्रित संख्या के कारण लगने वाले जाम से प्रतिदिन हजारों लोग जूझ रहे हैं।
मुंशी पुलिया चौराहा पर वाहनों के हार्न का शोर इतना अधिक है कि चंद सेकंड में ही दिल की धड़कनें बढ़ने लगती हैं। चौराहा पर कुछ देर रुकने पर बेचैनी होने लगती है। बढ़ते शहरीकरण के बीच अपने पुराने नाम के साथ पहचान बनाए हुए मुंशी पुलिया वर्तमान में जाम से जूझ रहे प्रमुख चौराहों में से एक है।
नवाबों के शासनकाल में यह चौराहा चुंगी नाका था। यहां पर शहर में आने वाले सामान से कर (चुंगी) वसूला जाता था। तब से इसका नाम मुंशी पुलिया चौराहा पड़ा। एक दौर आया जब उस समय की एशिया की सबसे बड़ी आवासीय योजना इंदिरानगर विकसित हुई तो यहां यातायात बढ़ने लगा।
अब तेजी से बढ़ते शहर और इस चौराहे से सीतापुर रोड सहित अन्य आउटर रोड को जोड़ने के कारण मौजूदा समय में यातायात का दबाव काफी बढ़ा है। मेट्रो ने मुंशी पुलिया स्टेशन बनाकर उसे हजरतगंज होकर एयरपोर्ट तक जोड़ने वाला कारिडोर बनाया है। इसके अलावा 170 करोड़ रुपये की लागत से ओवरब्रिज भी बना है, लेकिन भीषण जाम से सारी सुविधाएं बेपटरी नजर आ रही हैं।
छह अवैध स्टैंड, चार दिशाएं, सिर्फ दो सिपाही तैनात
मुंशी पुलिया चौराहे पर चारों दिशाओं में ई-रिक्शा और आटो के छह अवैध स्टैंड संचालित होते हैं। प्रत्येक स्टैंड पर हर समय औसतन 50 से 60 ई-रिक्शा और आटो खड़े मिलेंगे। ऐसे में करीब 300 आटो व ई-रिक्शा के होने से दिनभर जाम लगा रहता है। सुबह 10 से 11 और शाम छह से रात आठ बजे के बीच स्थिति अराजक हो जाती है।
चौराहे पर ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए केवल दो सिपाही तैनात हैं, जबकि यहां कम से कम छह की जरूरत है। पास ही में पुलिस बूथ और पिंक बूथ बना है, लेकिन पटरी से लेकर सड़क तक ठेलों का जमावड़ा रहता है। इनके बगल में ही ई-रिक्शा का अवैध स्टैंड है।

एंबुलेंस को भी नहीं मिलता रास्ता
सीतापुर रोड, बाराबंकी होकर दूसरे जिलों से बड़ी संख्या में मरीज रेफर होकर एंबुलेंस से इसी चौराहे से होकर लोहिया संस्थान या केजीएमयू पहुंचते हैं। मानस विहार की ओर से आने वाले रास्ते से अक्सर एंबुलेंस जाम में फंस जाती हैं। सड़क से लेकर सर्विस लेन अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुकी है।
जाम के कारण
- चौराहे से मड़ियांव, मुंशी पुलिया मेट्रो स्टेशन, पालीटेक्निक और वीरेंद्र जसवानी मार्ग के छह अवैध स्टैंड।
- बिना सिग्नल लाइट के यातायात संचालन, स्थिति संभालने के लिए विभाग के सिपाहियों की कमी।
- वीरेंद्र जसवानी मार्ग पर लगभग 14 से 15 फीट की दोनों ओर की संकरी सड़क।
- चारों दिशाओं की सर्विस लेन पर ठेलों का कब्जा और दुकानदारों का अतिक्रमण।
जाम से बचाने के विकल्प
- वीरेंद्र जसवानी मार्ग की सड़क का चौड़ीकरण, इंटरलाकिंग वाले हिस्से को कम करना।
- मुंशी पुलिया से आने वाले मार्ग को चौराहे से बाएं वीरेंद्र जसवानी की ओर भेजकर यू टर्न लेना।
- अवैध रूप से चल रहे ई रिक्शा और आटो स्टैंड को हटाकर यातायात को सुगम बनाना।
- चौराहा से पालीटेक्निक की ओर ओवरब्रिज के नीचे वाले हिस्से में दोनों ओर एक-एक लेन सड़क का निर्माण।
- वेंडिंग जोन और ई रिक्शा व आटो के लिए एक तरफ का हिस्सा सुव्यवस्थित करना।
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