उत्तर प्रदेश में शासन का सख्त फरमान, सड़क टूटने पर अब ठेकेदार ही नहीं, मुख्य अभियंता पर भी चलेगा कार्रवाई का चाबुक
उत्तर प्रदेश सरकार ने सड़क परियोजनाओं में लापरवाही रोकने के लिए कड़े नियम बनाए हैं। अब सड़क टूटने पर ठेकेदार ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
सड़क टूटने पर अब उच्चाधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय होगी।
मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता पर भी होगी कार्रवाई।
ठेकेदारों पर भारी जुर्माना और प्रतिबंध लगाने का प्रावधान।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे और राम वन गमन मार्ग के निर्माण के बाद सड़क टूटने की घटनाओं से शासन ने सबक लिया है। लोक निर्माण विभाग की सड़क परियोजनाओं के काम में लापरवाही को रोकने के लिए कड़े नियम बनाए जा रहे हैं। किसी भी सड़क परियोजना में लापरवाही पाए जाने पर अब मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
अभी सड़क परियोजनाओं के काम में इस तरह की लापरवाही पाए जाने पर ठेकेदार से क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कराने व जुर्माना लगाने के साथ ही पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई किए जाने का प्रविधान है।
जिम्मेदारी तय कर होगी कार्रवाई
पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव अजय चौहान ने बताया है कि टेंडर अनुबंध में भले ही पांच साल तक सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है, लेकिन ऐसी लापरवाही पाए जाने पर अब ठेकेदार पर अधिक जुर्माना लगाने के साथ ही उसे प्रतिबंधित करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा विभाग के मुख्य अभियंता स्तर तक के अभियंताओं की भी जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी।
यह भी पढ़ें- 16 साल की रागिनी का बड़ा कारनामा, कुशीनगर के तीन यूथ क्लबों से जुड़े 150 से अधिक ग्रामीण युवा
सड़क टूटने पर ठेकेदार के साथ ही विभागीय उच्चाधिकारियों की जवाबदेही और दंड का निर्धारण किया जा रहा है, आदेश जल्द जारी किया जाएगा। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) तथा राम वन गमन मार्ग सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) की परियोजना है। दोनों परियोजनाएं भले ही केंद्र सरकार की हैं, लेकिन इन मार्गों के टूटने से जनता में गलत संदेश गया है।
