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उत्तर प्रदेश में नए ई-रिक्शों के पंजीकरण पर लग सकती है रोक, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को दिया बड़ा निर्देश

Published: Wed, 04 Nov 2026 12:02 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को ई-रिक्शों की बढ़ती संख्या नियंत्रित करने और नए पंजीकरण पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।

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HighLights

  1. हाई कोर्ट ने ई-रिक्शा पंजीकरण पर रोक लगाने का निर्देश दिया।

  2. लखनऊ में 1.33 लाख ई-रिक्शों से यातायात जाम की समस्या।

  3. राज्य सरकार को चार सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश।

विधि संवाददाता, लखनऊ। राजधानी में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने ई-रिक्शों की संख्या नियंत्रित करने और प्रतिबंधित मार्गों पर उनके संचालन पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने कहा कि लखनऊ की सड़कों पर लगभग 1.33 लाख ई-रिक्शों का संचालन यातायात जाम का प्रमुख कारण है। ऐसे में इनकी संख्या निर्धारित सीमा से अधिक होने पर नए पंजीकरण रोकने की जरूरत है। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई नौ दिसंबर को नियत की है।

नए ई-रिक्शों के पंजीकरण पर लगे रोक

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति ए के चौधरी की पीठ ने स्थानीय अधिवक्ता सूरज सिंह विसेन की ओर से दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि यदि लखनऊ अथवा प्रदेश के किसी अन्य शहर में ई-रिक्शों की संख्या आवश्यकता से अधिक है तो मोटर वाहन अधिनियम की धारा 39 के तहत नए ई-रिक्शों के पंजीकरण पर रोक लगाने का निर्णय लिया जाए।

कोर्ट ने इस संबंध में चार सप्ताह के भीतर निर्णय लेने को कहा है।पीठ ने कहा कि ई-रिक्शों के पंजीकरण के लिए अनिवार्य व्यवस्था का पालन जरूरी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने आया कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को ई रिक्शा पंजीकरण के मुददे पर जो जानकारी दी है, उससे साफ है कि केंद्र ने केवल पंजीकरण पर निर्धारित शुल्क से छूट की जानकारी दी है, लेकिन मोटर वाहन अधिनियम की धारा 39 के तहत पंजीकरण की अनिवार्यता समाप्त करने की बात नहीं की गई है इसलिए बिना वैध पंजीकरण के ई-रिक्शों का संचालन स्वीकार्य नहीं है।

कई मार्गों पर ई-रिक्शों के संचालन पर प्रतिबंध

कोर्ट ने मोटर वाहन नियमावली, 1998 के नियम 178 के तहत ई-रिक्शों के संचालन को नियंत्रित करने की राज्य सरकार की शक्ति का उल्लेख किया। इस संबंध में 12 मई, 2022 का आदेश पहले से लागू है, जिसके तहत राजधानी के कई मार्गों पर ई-रिक्शों के संचालन पर प्रतिबंध लगाया गया है।

पीठ ने कहा कि प्रतिबंध के बावजूद आदेश का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है। लिहाजा विशेष जांच दल (एसआइटी) को आदेश का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। एसआइटी को पूर्व आदेश की समीक्षा कर अन्य उपयुक्त क्षेत्रों में भी प्रतिबंध लागू करने पर विचार करने को कहा गया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ई-रिक्शों के संचालन पर प्रतिबंध लगाते समय वैकल्पिक मार्ग भी निर्धारित किए जाएं, ताकि आम नागरिकों को परेशानी न हो। इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट अगली सुनवाई पर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

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