लखनऊ: मनी लॉन्ड्रिंग के तीन दोषियों को कोर्ट ने सुनाई 4-4 साल की कैद, 50-50 हजार का जुर्माना भी लगाया
लखनऊ की विशेष अदालत ने गांजा तस्करी से जुड़े धनशोधन मामले में तीन अभियुक्तों को चार-चार साल के कठोर कारावास और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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HighLights
तीन अभियुक्तों को चार साल का कठोर कारावास मिला।
50-50 हजार रुपये का अर्थदण्ड भी लगाया गया।
मामला 237 किलो गांजा बरामदगी से जुड़ा है।
विधि संवाददाता, लखनऊ। न्यायालय विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण)/सीबीआई(पश्चिम)/ईडी लखनऊ ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 की धाराओं के तहत दोषी ठहराए गए तीन अभियुक्तों शाहिद (ट्रक चालक), बृजकिशोर उर्फ बिरजू (गांजा प्राप्तकर्ता) और हरस्वरूप (ट्रक मालिक) को चार-चार साल के कठोर कारावास और 50-50 हजार रुपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई है।
ईडी की ओर से विशेष लोक अभियोजक असीम प्रताप सिंह ने न्यायालय के समक्ष बताया कि डीआरआई ने 11 जनवरी 2018 को एक ट्रक से 237 किलो गांजा बरामद किया था, जिसकी बाजारी कीमत 6,000 रुपये प्रति किलो के हिसाब से 14,24,040 रुपये आंकी गई। गांजा ओडिशा के जयपुर से जिला जालौन (उत्तर प्रदेश) ले जाया जा रहा था।
2025 में दर्ज की थी शिकायत
इस मामले में एनडीपीएस कोर्ट, लखनऊ ने 18 अप्रैल 2024 को सभी अभियुक्तों को 10 साल की सजा व एक-एक लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया था। गांजे की इतनी बड़ी मात्रा बरामद होने पर ईडी ने 31 मार्च 2020 को मामला दर्ज किया तथा विस्तृत जांच के बाद 18 फरवरी 2025 को अभियोजन शिकायत दाखिल की थी।
बताया गया कि जांच में दिलीप कुमार यादव का भी नाम सामने आया, जो अपने साथियों के साथ झांसी और जालौन में गांजा तस्करी का कारोबार फैलाना चाहता था और इसके लिए उसने दोषी बृजकिशोर से 3,000 रुपये प्रति किलो की दर से गांजा सप्लाई का सौदा किया था।
अभियोजन ने सभी अभियुक्तों को एक सिंडिकेट का हिस्सा बताते हुए कहा कि जब्त गांजे की कीमत प्रोसीड ऑफ क्राइम है। इसके अतिरिक्त ये भी बताया गया कि एनडीपीएस मामले में जमानत मिलने से अपराध समाप्त नहीं होता, इसलिए पीएमएलए की कार्यवाही पूरी तरह विधिपूर्ण है।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने तीनों दोषियों को चार-चार साल के सश्रम कारावास व 50-50 हजार रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई। इसी मामले में सह-अभियुक्त दीपक राणा ने जुर्म स्वीकार कर लिया था, जिसे 9 सितंबर 2026 को चार साल के कठोर कारावास और 50,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई जा चुकी है।
