लखनऊ की हवा में सांस लेना मुश्किल: दीपावाली से पहले AQI पहुंचा 300 के पार, तालकटोरा और आलमबाग में हालात गंभीर
राजधानी लखनऊ में दिवाली से पहले वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 के पार पहुंच गया है, जिससे हवा में सांस लेना मुश्किल हो गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
दिवाली से पहले लखनऊ का AQI 300 के पार पहुंचा।
तालकटोरा और आलमबाग में वायु गुणवत्ता सबसे खराब।
वाहनों का धुआं और निर्माण धूल प्रदूषण के मुख्य कारण।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। राजधानी की हवा में घुलती धूल और वाहनों से निकलता जहरीला धुआं लोगों की सांसों पर भारी पड़ने लगा है। सड़कों पर उड़ती धूल, जगह-जगह चल रहे निर्माण कार्यों, यातायात का बढ़ता दबाव और वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन वायु प्रदूषण को लगातार बढ़ा रहा है।
हालात यह हैं कि दिवाली से पहले ही इस सीजन में पहली बार लखनऊ का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) 300 के पार पहुंच गया। शुक्रवार शाम तालकटोरा में एक्यूआइ 304 दर्ज किया गया, जबकि शनिवार को आलमबाग सबसे प्रदूषित क्षेत्र रहा। यहां एक्यूआइ 282 तक दर्ज किया गया। दिवाली के बाद स्थिति और गंभीर होने की आशंका है।
शहर में बढ़ते प्रदूषण के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। निर्माण स्थलों पर मानकों का पालन नहीं होने से धूल के महीन कण आसपास के क्षेत्रों में फैल रहे हैं। दूसरी ओर, वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या और ट्रैफिक जाम के कारण निकलने वाला धुआं हवा की गुणवत्ता को और खराब कर रहा है। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को को सुनवाई के दौरान वाहनों के धुएं और भारी ट्रैफिक को इस संकट की सबसे बड़ी वजह बताया।
वाहनों का धुआं बढ़ा रहा सांसों का संकट
राजधानी में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रमुख चौराहों, बाजारों और व्यस्त मार्गों पर लगने वाले जाम में वाहन लंबे समय तक चालू रहते हैं। इससे कार्बन मोनोआक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड और सूक्ष्म कणों का उत्सर्जन होता है। पुराने और अधिक धुआं छोड़ने वाले वाहन इसके लिए अधिक जिम्मेदार हैं। खासकर पीक आवर्स में यातायात का दबाव प्रदूषण को और गंभीर बना देता है।
हर साल लखनऊ में लगभग 1.2 से 1.5 लाख नए वाहन सड़कों पर जुड़ते हैं। दिसंबर 2025 में राजधानी लखनऊ में पंजीकृत वाहनों की कुल संख्या लगभग 31.6 लाख थी, जो इस साल धनतेरस में करीब 32.8 लाख तक पहुंच गई है। इनमें बड़ी संख्या में पुराने वाहन भी हैं। लखनऊ प्रदेश में सबसे ज्यादा पंजीकृत वाहनों वाला जिला है। प्रयागराज दूसरे स्थान पर है।
तालकटोरा और आलमबाग में हवा सबसे खराब
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार शाम तालकटोरा क्षेत्र में एक्यूआइ 304 दर्ज किया गया। यहां पीएम 2.5 का स्तर 152 और पीएम 10 का स्तर 203 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। शनिवार को आलमबाग का एक्यूआइ 282 रहा, अलीगंज का 268 और तालकटोरा का 267 दर्ज किया गया। कुकरैल का एक्यूआइ 152 और गोमतीनगर का 164 रहा।
केजीएमयू में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में प्रो. डा. दर्शन बजाज ने कहा कि तापमान में गिरावट और हवा की गति कम होने पर प्रदूषक तत्व वातावरण में अधिक समय तक बने रहते हैं। दिवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं और सूक्ष्म कण प्रदूषण के स्तर को और बढ़ा सकते हैं।
ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, हृदय रोगियों और अस्थमा के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रदूषित हवा में लंबे समय तक सांस लेना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है।
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हवा के दूषित होने के पीछे धूल प्रमुख वजह है। हालांकि, काफी हद तक पुरानी गाड़ियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं। इसके नियंत्रण के लिए विभाग की पांच सदस्यीय टीम रोजाना अलग-अलग इलाकों का निरीक्षण कर रही है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। -जेपी मौर्य, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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