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लखनऊ के लोहिया संस्थान में अब मिलेगी आंखों के इलाज की आधुनिक सुविधा, OCT एंजियोग्राफी और लेजर यूनिट शुरू

Published: Sat, 10 Oct 2026 10:55 PM (IST)

लखनऊ के लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में रेटिनल पैटर्न स्कैनिंग लेजर यूनिट और ओसीटी एंजियोग्राफी सुविधाओं का शुभारंभ हुआ है। इन ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. रेटिनल पैटर्न स्कैनिंग लेजर यूनिट का शुभारंभ।

  2. ओसीटी एंजियोग्राफी से रेटिना की विस्तृत जांच।

  3. डायबिटिक रेटिनोपैथी सहित आंखों का बेहतर उपचार।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में आंखों के मरीजों को बेहतर और उच्चस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। संस्थान में शनिवार को निदेशक प्रो. सीएम सिंह ने रेटिनल पैटर्न स्कैनिंग लेजर यूनिट और आप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (ओसीटी) एंजियोग्राफी की सुविधा का शुभारंभ किया।

इन अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से रेटिना से जुड़ी विभिन्न बीमारियों की पहचान और उपचार में मदद मिलेगी। विशेष रूप से डायबिटिक रेटिनोपैथी तथा आंखों की रेटिना की रक्तवाहिकाओं से संबंधित रोगों के प्रबंधन में ये तकनीक उपयोगी साबित होंगी।

प्रो. सीएम सिंह ने कहा, नई तकनीकों के शुरू होने से नेत्र रोग विभाग में मरीजों की जांच और उपचार की सुविधाओं को मजबूती मिलेगी। मधुमेह से पीड़ित मरीजों में रेटिना को होने वाले नुकसान की समय रहते पहचान करना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि बीमारी बढ़ने पर आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में आधुनिक जांच तकनीकें बीमारी की स्थिति का आकलन करने और उपचार की बेहतर योजना तैयार करने में मददगार होती हैं।

जोखिम कम करने में होगा सहायक

रेटिनल पैटर्न स्कैनिंग लेजर तकनीक का उपयोग रेटिना की कुछ बीमारियों के उपचार में किया जाता है। इस तकनीक के माध्यम से लेजर के निर्धारित पैटर्न का उपयोग कर रेटिना के प्रभावित हिस्सों का उपचार किया जा सकता है। डायबिटिक रेटिनोपैथी के कुछ मामलों में लेजर उपचार बीमारी को नियंत्रित करने और दृष्टि को और अधिक नुकसान पहुंचने के जोखिम को कम करने में सहायक होता है।

डायबिटिक रेटिनोपैथी मधुमेह की एक गंभीर जटिलता है, जिसमें आंख के पीछे स्थित रेटिना की रक्तवाहिकाएं प्रभावित होने लगती हैं। समय पर जांच और उचित उपचार से गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा आप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी एंजियोग्राफी यानी ओसीटी एंजियोग्राफी आंखों की रेटिना और उसके नीचे की परतों में मौजूद रक्त प्रवाह का विस्तृत आकलन करने वाली आधुनिक इमेजिंग तकनीक है।

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इसकी मदद से रेटिना की सूक्ष्म रक्तवाहिकाओं में होने वाले बदलावों का भी पता लगाना संभव है। यह जांच सामान्यतः बिना डाई इंजेक्ट किए की जा सकती है। इस मौके पर डीन राजन भटनागर, सीएमएस प्रो. विक्रम सिंह, एमएस प्रो. अरविंद सिंह, विभागाध्यक्ष डा. लक्ष्मी सिंह, डा. आलोक रंजन और डा. प्रोलिमा ठक्कर मौजूद रहीं।