कुकरैल नाइट सफारी: सुप्रीम कोर्ट की CEC ने उठाए सवाल, सरकार को नए सिरे से करनी होगी योजना की समीक्षा
सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने कुकरैल नाइट सफारी परियोजना के लेआउट और पर्यावरणीय मंजूरियों पर सवाल उठाए हैं।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
सीईसी ने कुकरैल नाइट सफारी परियोजना पर गंभीर सवाल उठाए।
सरकार को योजना की नए सिरे से समीक्षा का निर्देश दिया गया।
संशोधित डीपीआर और मास्टर प्लान तैयार करने को कहा।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश सरकार को कुकरैल नाइट सफारी परियोजना को लेकर पूरी योजना की नए सिरे से समीक्षा करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में परियोजना के लेआउट, निर्माण गतिविधियों और पर्यावरणीय मंजूरियों पर सवाल उठाए हैं। समिति ने मुख्य सचिव को बिंदुवार समीक्षा कर निर्णय लेने और संशोधित डीपीआर व मास्टर प्लान को नए सिरे से तैयार कराने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में 27 अक्टूबर को दाखिल रिपोर्ट के मुताबिक, 10 सितंबर को परियोजना स्थल के निरीक्षण में कई ऐसी गतिविधियां मिलीं, जो सवाल खड़े करती हैं। जिस जमीन का वन विभाग ने लोक निर्माण विभाग को औपचारिक हस्तांतरण नहीं किया था, वहां मिट्टी समतल करने, वाहनों की आवाजाही, अस्थायी ढांचे और मशीनों की मौजूदगी के साक्ष्य मिले। जंगल की निचली वनस्पति और फारेस्ट फ्लोर भी प्रभावित मिला। पेड़ों की मौके पर की गई मार्किंग और वन विभाग की सूची में भी अंतर पाया गया है।
सीईसी ने संबंधित अभिलेखों के आधार पर यह सत्यापित करने को कहा है कि किस प्राधिकरण के तहत काम कराया गया और इसकी अनुमति थी या नहीं। हालांकि, समिति ने अभी किसी नियम के उल्लंघन का अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
सरकार भी हो गई राजी
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने इसी वर्ष 15 जुलाई को शर्तों के साथ परियोजना को आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी, लेकिन नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान को स्थानांतरित करने, एडवेंचर पार्क बनाने और सड़क को चार लेन करने के प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दी थी। सीईसी ने एडवेंचर पार्क के लिए चिह्नित जमीन को प्राकृतिक वनस्पति और वन आवरण के साथ सुरक्षित रखने को कहा है। इस पर सरकार राजी भी हो गई है।
पेड़ों के संरक्षण के लिए समिति ने 14 बिंदुओं पर सिफारिशें की हैं। निर्माण का अलाइनमेंट और डिजाइन बदलकर पेड़ों को बचाने का प्रयास करना होगा। कटाई अपरिहार्य होने पर ही अनुमति दी जाए।
सभी पेड़ों की प्रजातिवार सूची बनाकर सुरक्षित रखे जाने, स्थानांतरित होने और काटे जाने वाले पेड़ों का ब्योरा तैयार करना होगा। पेड़ों को परियोजना क्षेत्र अथवा कुकरैल रिजर्व फारेस्ट के भीतर स्थानांतरित करने को प्राथमिकता दी जाएगी। कटाई होने पर एक पेड़ के बदले 10 देशी प्रजातियों के पौधे लगाने और उनकी निगरानी की व्यवस्था करनी होगी।
समिति ने प्राकृतिक जल निकासी मार्गों, मौसमी नालों, वेटलैंड और छोटे पारिस्थितिकी क्षेत्रों की मैपिंग कराने तथा जमीन की सीमाओं और खसरा नंबरों का सत्यापन करने को भी कहा है। आपात स्थिति के लिए सर्विस लेन छह मीटर करने और इमरजेंसी एग्जिट गेट बनाने पर विचार करने की सिफारिश की है।
सीईसी ने ओवरसाइट कमेटी गठित करने और संशोधित डीपीआर व मास्टर प्लान को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) से मंजूरी लेकर अगली बैठक से पहले उपलब्ध कराने को कहा है। साथ ही स्पष्ट किया है कि फेज-दो यानी डे-जू के नाम पर मौजूदा शर्तों का अनुपालन नहीं टाला जा सकता है। जरूरी वैधानिक मंजूरी मिलने तक संबंधित काम शुरू नहीं होंगे। यह परियोजना करीब 1510.57 करोड़ रुपये की है।
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सुप्रीम कोर्ट की शर्तों के अनुसार संशोधित डीपीआर व मास्टर प्लान तैयार कराकर उसे सीजेडए के पास फिर से स्वीकृति के लिए भेज दिया गया है। चूंकि पहले चार लेन सड़कें बननी थी उसे अब दो लेन किया गया है। इसके अलावा और भी संशोधन डीपीआर व मास्टर प्लान में किए गए हैं। अभी मौके पर कोई काम शुरू नहीं किया गया है। स्वीकृति मिलने के बाद ही इसका शिलान्यास कराया जाएगा। -राम कुमार, निदेशक, कुकरैल नाइट सफारी
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