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KGMU में 'द केरल स्टोरी' की तर्ज पर स्लीपर मॉड्यूल: सहानुभूति के जाल में फंसाकर महिला डॉक्टरों के मतांतरण की साजिश

By Pulak TripathiEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Sun, 01 Nov 2026 01:03 AM (IST)

लखनऊ के किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में मतांतरण और उत्पीड़न के एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ है।

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HighLights

  1. केजीएमयू में मतांतरण और उत्पीड़न गिरोह का खुलासा।

  2. एसटीएफ जांच में 'स्लीपर मॉड्यूल' की भूमिका सामने आई।

  3. महिला डॉक्टरों को झूठे प्रेमजाल में फंसाया जा रहा था।

पुलक त्रिपाठी, लखनऊ। शहर के सबसे प्रतिष्ठित किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में मतांतरण और उत्पीड़न के संगठित गिरोह के खुलासे के बाद खलबली मची है। एसटीएफ द्वारा शासन को सौंपी गई जांच रिपोर्ट के बाद संस्थान की साख पर गहरा धक्का लगा है।

हालांकि, इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में एक अजीब सी खामोशी पसरी है। शनिवार को परिसर का जायजा लिया गया तो मरीजों और तीमारदारों की चहल-पहल तो दिखी, लेकिन डाक्टर, नर्स से लेकर वार्ड ब्वाय तक इस संवेदनशील मसले पर चुप्पी साधे हैं।

'केरल फाइल्स ' की तर्ज पर बिछाया स्लीपर माड्यूल

सूत्रों के मुताबिक, फिल्म 'द केरल स्टोरी' की स्क्रिप्ट की भांति ही केजीएमयू में भी पढ़ाई करने आने वाली नई महिला डाक्टर पर रमीजुद्दीन के गिरोह की पैनी निगाह रहती थी। दूर-दराज के जिलों व अन्य राज्यों से आने वाली नवोदित छात्राओं को सहानुभूति और झूठे प्रेमजाल में फंसाकर मतांतरण का दबाव बनाने का घिनौना खेल खेला जा रहा था।

नए शहर में इन युवतियों की रेकी करके उनकी हर समस्या को तत्काल सुलझाकर हमदर्दी हासिल की जाती थी। परिसर में भी उनको अपने साथ रहने पर हर सुविधा मिलने का प्रलोभन दिया जाता था। एक अधिकारी ने बताया कि एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि पैथोलाजी, माइक्रोबायोलाजी, रेडियोलाजी और गांधी वार्ड जैसे प्रमुख विभागों में तैनात आया, नर्स और वार्ड ब्वाय यहां तक की पार्किंग के कर्मचारी तक इस सिंडिकेट के स्लीपर माड्यूल' की तरह काम कर रहे थे।

ये कर्मचारी निशाने पर ली गई डाक्टरों की गतिविधियों की रेकी कर मुख्य सरगना तक सूचनाएं पहुंचाते थे। एसटीएफ की टीम इस नेटवर्क की तह तक पहुंचने के लिए कई दिनों तक तीमारदार बनकर वार्डों में मुस्तैद रही। मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसके तार अंतरराष्ट्रीय फंडिंग वाले बड़े मतांतरण सिंडिकेटों से जुड़ने की आशंका बढ़ रही है।

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हाल ही में बलरामपुर के बहुचर्चित जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा गिरोह के तार इंटीग्रल यूनिवर्सिटी से जुड़े मिले थे। इसके बाद अब जांच एजेंसियां इस बात की गहन पुष्टि में जुटी हैं कि शहर और प्रदेश के ऐसे कौन से शिक्षण, मेडिकल व व्यावसायिक संस्थान हैं, जहां यह सिंडिकेट सक्रिय है और हिंदू युवतियों को लव जिहाद का शिकार बना रहा है।

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