यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 04, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आइएसआइ को सेना की गोपनीय सूचना देने में झांसी एसडीएम का दफ्तर सीज
आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता में उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वायड ने झांसी के एसडीएम का ऑफिस सीज कर दिया है। यहां से आपत्तिजनक दस्तावेज मिले हैं।

लखनऊ (जेएनएन)। झांसी से सेना के गोपनीय दस्तावेज आइएसआइ को भेजे जाने का मामला सामने आया है। खुफिया इकाइयों की सूचना पर आज एटीएस टीम ने वहां एसडीएम सदर के दफ्तर पर छापा डाला और कर्मचारियों से पूछताछ की। एटीएस अधिकारियों ने कंप्यूटर, पेन ड्राइव व कई अभिलेख अपने कब्जे में ले लिए हैं। जांच और पूछताछ का क्रम जारी रहेगा। एक-दो दिनों में इस सिलसिले में गिरफ्तारी भी संभव है। यूपी एटीएस के आइजी असीम अरुण ने बताया कि खुफिया इकाइयों से यह सूचना हासिल हुई कि झांसी स्थित एसडीएम सदर के कार्यालय से भारतीय सेना से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं दूसरे मुल्कों के जासूसी एजेंटों तक भेजी जा रही हैं।
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इसी क्रम में एटीएस के उप निरीक्षक केएम राय के नेतृत्व में एक टीम ने शुक्रवार को वहां जाकर कर्मचारियों से पूछताछ की और अभिलेख कब्जे में लिए। कई उपकरण भी कब्जे में लिये गए हैं। उन्होंने बताया कि जांच का सिलसिला जारी है और आगे चलकर कई और तथ्य सामने आ सकते हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भी झांसी से आइएसआइ का कनेक्शन उजागर हो चुका है। फरवरी 2014 में एटीएस ने झांसी में सेवानिवृत्त सूबेदार इंद्रपाल कुशवाहा को गिरफ्तार किया था तो उससे कई चौंकाने वाले रहस्य उजागर हुए थे। कुशवाहा के पास से दो सीडी मिली थी जिसमें सेना का वॉर प्लान, 11 जीआरआरसी का आरबिट प्लान, सैन्य अधिकारियों की टेलीफोन डायरेक्ट्री व सैन्य व्यवस्थापन की सूचनाएं और युद्धक टैंक अर्जुन प्रोजेक्ट में कार्यरत अधिकारियों के विवरण थे। इसे उसने आइएसआइ को बेचा था। जांच में यह बात भी सामने आई थी कि इसमें पूरा नेटवर्क काम कर रहा है जिसके आधार पर कई लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। इससे पहले सितंबर 2009 में यूपी एटीएस ने झांसी से ही आइएसआइ को सूचनाएं भेजने वाले पाकिस्तान के इम्तियाज अली सिद्दीकी और कानपुर के बिठूर से वकास अहमद उर्फ जाहिद को पकड़ा था।
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हर संदिग्ध कॉल पर पहरा
आतंकी कनेक्शन की जानकारी के बाद अंतरराष्ट्रीय कॉल निगरानी के जरिए आतंकी गिरोह से जुड़े लोगों तक पहुंचने की तैयारी की जा चुकी है। पाकिस्तान और सउदी की कॉल पर विशेष नजर रख रही है। सभी अंतरराष्ट्रीय कॉल की निगरानी बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई और दिल्ली पर बने गेटवे के जरिए की जा रही है। एक-एक जिले में दो हजार इंटरनेशनल कॉल आने-जाने की सूचना है। एटीएस को बड़ी आतंकी गतिविधि का संदेह है। अतः आने-जाने वाली मोबाइल व फोन की हर संदिग्ध कॉल पर सख्त पहरा है।
