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लखनऊ के टोल प्लाजा पर STF की बड़ी कार्रवाई: फर्जी फास्टैग धांधली की फोरेंसिक जांच शुरू, 3 साल का सर्वर डेटा सीज

Published: Thu, 24 Sep 2026 04:29 PM (IST)

एसटीएफ ने लखनऊ-सीतापुर राजमार्ग स्थित इटौंजा टोल प्लाजा पर कार्रवाई करते हुए सर्वर और अन्य उपकरण जब्त किए हैं। अब इन उपकरणों की फोरेंसिक जांच की जा रही है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. एसटीएफ ने इटौंजा टोल प्लाजा से सर्वर और उपकरण जब्त किए।

  2. फर्जी फास्टैग और संदिग्ध नंबरों की फोरेंसिक जांच शुरू की गई।

  3. तीन साल का सर्वर डाटा और टोल प्रबंधक जांच के दायरे में।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। लखनऊ-सीतापुर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित इटौंजा टोल प्लाजा पर एसटीएफ की कार्रवाई के बाद अब जब्त सर्वर और अन्य उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी फास्टैग और संदिग्ध नंबरों के जरिये प्रतिदिन कितने वाहन टोल से निकले।

इसके साथ ही तीन साल का सर्वर डाटा भी जांच के दायरे में है। साथ ही टोल प्रबंधक को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया गया है। उधर, मंगलवार दोपहर करीब दो बजे कार्रवाई के बाद से टोल की वसूली प्रभावित है।

एसटीएफ ने टोल प्लाजा से सर्वर, डीवीआर समेत अन्य उपकरण सीज किए हैं। इनकी फोरेंसिक जांच से वाहनों के आवागमन, फास्टैग से हुए भुगतान और टोल की रकम किस बैंक खाते में गई, इसकी जानकारी सामने आने की उम्मीद है। एसटीएफ ने सर्वर से फास्टैग के जरिये हुए लेनदेन का बैंकवार ब्योरा भी सुरक्षित किया है। एसटीएफ के मुताबिक इटौंजा टोल प्रबंधक से करीब एक महीने से डाटा मांगा जा रहा था।

पूछताछ के लिए नोटिस जारी

इसके लिए तीन नोटिस भी दिए गए, लेकिन अपेक्षित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। जबकि नवाबगंज, निगोहां समेत अन्य टोल से संबंधित जानकारी जांच टीम को मिल चुकी है। इटौंजा से डाटा नहीं मिलने के कारण विवेचना प्रभावित हो रही थी। अब सीज उपकरणों की फोरेंसिक जांच के साथ टोल प्रबंधक को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया गया है।

जांच में ओवरलोड वाहनों से सामान्य दर का टोल लेने, बिना फास्टैग वाहनों से आनलाइन भुगतान के बजाय नकद रकम लेने और ऐसे वाहनों के रिकार्ड में गड़बड़ी की भी पड़ताल होगी। एसटीएफ को आशंका है कि मुख्य सर्वर के समानांतर कोई दूसरा सर्वर लगाकर वाहनों के आवागमन का अलग रिकार्ड तो तैयार नहीं किया जा रहा था। शक है कि कुछ वाहनों की टोल पर्ची और भुगतान का रिकार्ड मुख्य सर्वर के बजाय किसी दूसरे माध्यम में दर्ज किया गया हो।

केंद्रीय प्रणाली में दर्ज होता है रिकॉर्ड

हालांकि, अब तक टोल परिसर में ऐसा कोई समानांतर सर्वर नहीं मिला है। नियम के मुताबिक टोल प्लाजा के कंप्यूटर और सर्वर एनएचएआइ व संबंधित बैंक के सर्वर से जुड़े होते हैं। वाहन के टोल पार करते ही उसका रिकार्ड केंद्रीय प्रणाली में दर्ज होता है। इसी रिकार्ड में छेड़छाड़ या उससे अलग व्यवस्था बनाए जाने की आशंका की जांच की जा रही है।

नवाबगंज में अप्रैल में खुला था फर्जी नंबर का खेल: फर्जी नंबर से टोल पर्ची काटे जाने का मामला अप्रैल में नवाबगंज टोल प्लाजा पर सामने आया था। तीन अप्रैल 2026 को जांच में सामने आया कि एक ओवरलोड ट्रक की टोल पर्ची पर एमए-34-एस-9455 नंबर दर्ज था, जबकि ऑनलाइन जांच में इस नंबर का कोई वाहन रिकार्ड नहीं मिला।

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बाद में परिवहन विभाग की जांच में फर्जी नंबरों से ओवरलोड वाहनों को टोल पार कराने का मामला सामने आया। जांच में एक वास्तविक ट्रक यूपी-32-जेडएन-8925 का मामला भी सामने आया। ट्रक के टोल रिकार्ड में एमए-34-एस-9455 नंबर दर्ज था। यानी सड़क पर चल रहा वाहन अलग और टोल पर्ची पर दर्ज नंबर अलग था। चार दिन में इसी तरह दो बार टोल पार करने का रिकार्ड भी मिला।

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इसके बाद परिवहन विभाग की जांच में नवाबगंज टोल से तीन महीने में गुजरे 163 ओवरलोड वाहनों में से 101 के नंबर संदिग्ध/फर्जी पाए गए। इनमें फर्जी नंबर वाले फास्टैग इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई।