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आयकर विभाग का बड़ा खुलासा: 46 रजिस्ट्री कार्यालयों में 5121 करोड़ की कर चोरी पकड़ी

Published: Fri, 16 Oct 2026 11:47 PM (IST)

आयकर विभाग ने उत्तर प्रदेश के 46 रजिस्ट्री कार्यालयों में संपत्तियों के बैनामों की जांच में 5121 करोड़ रुपये की ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

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HighLights

  1. आयकर विभाग ने 5121 करोड़ रुपये की कर चोरी का खुलासा किया।

  2. 46 रजिस्ट्री कार्यालयों में हजारों संपत्ति बैनामों में गंभीर गड़बड़ी मिली।

  3. 45 लाख से अधिक के संपत्ति बैनामे पर पैन अनिवार्य।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। आयकर विभाग के इंटेलिजेंस और आपराधिक अन्वेषण शाखा ने रजिस्ट्री कार्यालयों में संपत्तियों(भवन-भूखंड) के बैनामों(सेल डीड) की जांच में 5121 करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी है। लखनऊ से नेपाल सीमा तक के जिलों के 46 रजिस्ट्री कार्यालयों के कुल 26,628 बैनामों की जांच में से 9144 बैनामों में गंभीर गड़बड़ी मिली।

4311 बैनामों में क्रेता-विक्रेता के पैन व संपत्ति आदि की जानकारी ही नहीं दी गई थी, जबकि 1714 बैनामों के लेन-देन में 1160.75 करोड़ रुपये की गड़बड़ी मिली है। 3119 बैनामों का कोई रिकार्ड ही नहीं मिला है।

हजरतगंज स्थित आयकर मुख्यालय में शुक्रवार को संयुक्त निदेशक सोनल सिंह ने मीडिया को बताया कि लखनऊ की अन्वेषण शाखा द्वारा लखनऊ के आसपास के साथ ही नेपाल सीमा से सटे जिलों के 46 रजिस्ट्री कार्यालयों में पिछले एक वर्ष के दौरान बैनामों की छानबीन की गई। संपत्तियों की रजिस्ट्री में बड़े पैमाने पर कर चोरी के संबंध में विभाग ने राज्य सरकार को जानकारी दे दी गई है।

स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के जिन अधिकारियों-कर्मचारियों ने अपनी जिम्मेदारी सही से नहीं निभाई है, उनकी सूची भी सरकार से साझा की गई है। उप निदेशक संदीप सिंह ने बताया कि बैनामों की जांच में सभी को नोटिस दिया गया था।

नोटिस के बाद 14,414.82 करोड़ रुपये के 17,487 बैनामों की जानकारी को सही करा लिया गया है। संयुक्त निदेशक ने बताया कि जांच में कुछ बैंकों द्वारा ग्राहकों को दिए गए ब्याज की एसएफटी (वित्तीय लेनदेन का विवरण) रिपोर्ट नहीं दिए जाने के मामले भी सामने आया है, जिसकी जांच की जा रही है।

अब 45 लाख रुपये के बैनामे पर पैन जरूरी

अब 45 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति के बैनामों में पैन दर्ज करना अनिवार्य होगा। उप निदेशक संदीप सिंह ने बताया कि पहले 30 लाख या इससे अधिक की संपत्ति के खरीद फरोख्त की सूचना आयकर को देनी जरूरी थी। अब यह सीमा बढ़ाकर 45 लाख रुपये कर दी गई है।

आयकर विभाग ने संपत्तियों की रजिस्ट्री में लेन-देन पर अपना शिकंजा कसा है। संबंधित संस्थाओं और बैंकों से एसएफटी यानी बड़े लेन देन की जानकारी समय से विभाग को देने की अपेक्षा की गई है। सिंह ने बताया कि ऐसा न करने पर जुर्माना लगाया जा सकता है।

राज्य सरकार ने आनलाइन सिस्टम का किया अनुरोध

स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के प्रमुख सचिव अमित गुप्ता ने बताया कि इस संबंध में आयकर अधिकारियों के साथ बैठकें हुई हैं। पुराने बैमानों में गड़बड़ी मिलने के मामले सामने लाए गए थे। जिन मामलों में रजिस्ट्री कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे उनके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी।

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गुप्ता ने बताया कि संपत्तियों की रजिस्ट्री का ब्योरा मैनुअल उपलब्ध कराए जाने में भी गड़बड़ी होने की आशंका रहती है इसलिए उन्होंने आयकर विभाग से रजिस्ट्री विभाग के पूरे सिस्टम को आनलाइन करने का अनुरोध किया है। चूंकि अब आधार व पैन की अनिवार्यता के साथ ही संपत्ति की रजिस्ट्री का सिस्टम आनलाइन है इसलिए किसी तरह की गड़बड़ी होने की आशंका नहीं है।