594 KM लंबा गंगा एक्सप्रेसवे बनेगा ‘ग्रीन कारिडोर’, लगेंगे 5.50 लाख पौधे; हर किलोमीटर पर होगा खास पौधा
उत्तर प्रदेश सरकार गंगा एक्सप्रेसवे को 'ग्रीन कॉरिडोर' के रूप में विकसित कर रही है, जिसके तहत 594 किलोमीटर लंबे मार्ग पर 5.50 लाख पौधे लगाए जाएंगे।
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गंगा एक्सप्रेसवे।
HighLights
594 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे की दोनों पटरियों पर लगेंगे पौधे
हर एक किलोमीटर पर होगा ‘हरिशंकरी’ पौधो का रोपण
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश सरकार ने पौधारोपण महाभियान के तहत गंगा एक्सप्रेसवे को हरित पहचान देने की बड़ी तैयारी की है। 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे की दोनों पटरियों पर लगभग 5.50 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इसे केवल यातायात कॉरिडोर तक सीमित न रखकर “ग्रीन कारिडोर” के रूप में विकसित करना है।
योगी सरकार इस मानसून सीजन में भी एक दिन में 35 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा है। इस अभियान के तहत अलग-अलग क्षेत्रों का चयन किया जा रहा है जहां पौधारोपण किया जा सकता है। इसी के तहत करीब नवनिर्मित गंगा एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर करीब 500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में पौधारोपण किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए पीपल, बरगद, पाकड़, गूलर, नीम, शीशम, जामुन, महुआ, आम, महोगनी, अर्जुन, चिलबिल, गुलमोहर, जकरकंडा, कचनार और अमलतास जैसी छायादार एवं पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार ने विशेष रूप से एक्सप्रेसवे की दोनों पटरियों पर प्रत्येक किलोमीटर पर ‘हरिशंकरी’ पौधों का रोपण करने का भी निर्णय लिया है। ‘हरिशंकरी’ में पीपल, बरगद और पाकड़ के पौधे एक साथ लगाए जाते हैं, जिन्हें भारतीय परंपरा में धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पौधों की सुरक्षा और बेहतर रखरखाव के लिए तार-बाड़ फेंसिंग तथा ड्रिप इरीगेशन सिस्टम की व्यवस्था भी की जाएगी।
इससे पौधों को नियमित सिंचाई मिल सकेगी और उनकी जीवित रहने की दर में वृद्धि होगी। गंगा एक्सप्रेसवे के साथ ही अन्य हाइवे के किनारे भी बड़े स्तर पर हरित पट्टी विकसित करने की योजना है। इसके अंतर्गत कुल 2336 स्थलों पर 11,325 हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगभग दो करोड़ पौधों के रोपण का लक्ष्य तय किया गया है।
