एफसीएम इंजेक्शन से गर्भवती महिलाओं में दूर होगी खून की कमी
गर्भावस्था के दौरान एनीमिया से जूझ रही महिलाओं के इलाज के लिए अब फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (एफसीएम) इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
गर्भावस्था में एनीमिया के इलाज को एफसीएम इंजेक्शन से बेहतर बनाया जा रहा है।
रायबरेली सहित पांच जिलों में सफल प्रयोग के बाद पूरे यूपी में विस्तार।
10 हजार से अधिक एफसीएम डोज दिए जा चुके हैं, प्रशिक्षण भी जारी है।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। गर्भावस्था के दौरान एनीमिया (खून की कमी) से जूझ रही महिलाओं के इलाज में अब फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (एफसीएम) इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जा रहा है। रायबरेली, सीतापुर, हरदोई, श्रावस्ती और बहराइच में इसके प्रयोग के बाद अब इसे राज्य के सभी सरकारी चिकित्सालयों में शुरू करने की तैयारी है।
अब तक 10 हजार से अधिक एफसीएम डोज दिए जाने का दावा किया गया है। एफसीएम नस के जरिये शरीर में आयरन पहुंचाता है, जिससे आयरन की कमी पूरी करने और हीमोग्लोबिन बनने में मदद मिलती है। इसकी खुराक महिला की स्थिति और चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार तय होती है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डा. पिंकी जोवेल के अनुसार, एनीमिया से पीड़ित कुछ गर्भवती महिलाओं में आयरन-फोलिक एसिड की गोलियों से अपेक्षित सुधार नहीं होता। कुछ महिलाओं को गोलियां नियमित रूप से लेने में परेशानी होती है, जबकि कुछ में गोलियों के दुष्प्रभाव सामने आते हैं। ऐसे में चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार नस के जरिये आयरन देने का विकल्प अपनाया जा सकता है।
दिया जा रहा प्रशिक्षण
डा. पिंकी के अनुसार, गर्भवती महिलाओं के उपचार के लिए एफसीएम को आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल किया गया है। इसकी खरीद सरकारी संस्थानों के माध्यम से की जा रही है और डाक्टरों व स्टाफ नर्सों को इसके इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसे मातृ एनीमिया की स्क्रीनिंग, रेफरल, ट्रैकिंग और उपचार से भी जोड़ा गया है, ताकि महिला की पहचान से लेकर उपचार और फालोअप तक सेवाओं की निरंतरता बनी रहे।
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रायबरेली से एफसीएम के इस्तेमाल की पहल शुरू की गई। इसके बाद सीतापुर, हरदोई, श्रावस्ती और बहराइच में फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) के डाक्टरों और स्टाफ नर्सों को एफसीएम के इस्तेमाल के साथ एनीमिया प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया।
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एनीमिया मुक्त भारत की राष्ट्रीय गाइडलाइन में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में जरूरत के अनुसार नस के जरिये आयरन देने के सुरक्षित और मानकीकृत इस्तेमाल पर जोर दिया गया है।
